कावेरी जल विवाद: तमिलनाडु सरकार का DMK पर आरोप - 'कर्नाटक के साथ मिलकर डाल रही अड़चनें'
तमिलनाडु में कावेरी जल विवाद को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। राज्य के मंत्री निर्मल कुमार ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पार्टी कर्नाटक के साथ मिलकर…
तमिलनाडु में कावेरी जल विवाद को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। राज्य के मंत्री निर्मल कुमार ने द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि पार्टी कर्नाटक के साथ मिलकर तमिलनाडु को कावेरी का जायज पानी मिलने में बाधा डाल रही है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, मंत्री का दावा है कि DMK नहीं चाहती कि इस पुराने विवाद को सुलझाने का श्रेय मुख्यमंत्री विजय को मिले।
चेन्नई में पत्रकारों से बातचीत में निर्मल कुमार ने कहा कि DMK की ये कोशिशें राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित हैं ताकि मुख्यमंत्री को इस मुद्दे पर जनता की सराहना न मिल सके। उन्होंने सीधे तौर पर कहा, “DMK नहीं चाहती कि मुख्यमंत्री विजय को जनता के बीच अच्छी छवि मिले। इसीलिए वह कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के साथ मिलकर कावेरी मुद्दे पर अड़चनें पैदा कर रही है।”
विपक्षी दलों की भूमिका पर सवाल
मंत्री निर्मल कुमार ने सिर्फ DMK ही नहीं, बल्कि AIADMK के रवैये पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने पूछा कि विधानसभा में इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाने के बजाय AIADMK ने अदालत का रास्ता क्यों चुना। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कावेरी के पानी पर सर्वदलीय बैठक की मांग के बीच राज्य में राजनीतिक एकता की कमी दिख रही है, जिससे राज्य के हितों को सुरक्षित करने के प्रयास कमजोर पड़ सकते हैं।
'सरकार अपने प्रयास जारी रखेगी'
DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन के इस दावे पर कि मुख्यमंत्री विजय राजनीतिक रूप से अलग-थलग पड़ गए हैं, निर्मल कुमार ने कहा कि ऐसे बयानों का तमिलनाडु के हितों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि विपक्षी आलोचना के बावजूद सरकार राज्य के पानी के अधिकारों के लिए अपनी कोशिशें जारी रखेगी। मंत्री ने कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह पानी के बंटवारे पर कांग्रेस आलाकमान की बात सुनने को तैयार नहीं हैं, लेकिन स्टालिन की बात मानने के लिए ज़्यादा इच्छुक लगते हैं।
इनपुट: IANS



