त्रिपुरा: आदिवासी क्षेत्रों के चुनाव से पहले ही भाजपा गठबंधन को बड़ी बढ़त, 35% से ज़्यादा सीटें निर्विरोध जीतीं
त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों में एक दशक के लंबे अंतराल के बाद हो रहे ग्राम समिति चुनावों से पहले ही सत्तारूढ़ गठबंधन ने एक महत्वपूर्ण बढ़त हासिल कर ली है। 28 सितंबर को होने वाले मतदान से पूर्व…
त्रिपुरा के आदिवासी क्षेत्रों में एक दशक के लंबे अंतराल के बाद हो रहे ग्राम समिति चुनावों से पहले ही सत्तारूढ़ गठबंधन ने एक महत्वपूर्ण बढ़त हासिल कर ली है। 28 सितंबर को होने वाले मतदान से पूर्व, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सहयोगी टिपरा मोथा पार्टी (TMP) और भाजपा ने मिलकर लगभग 36 प्रतिशत सीटों पर निर्विरोध जीत दर्ज कर ली है।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, त्रिपुरा जनजातीय क्षेत्र स्वायत्त जिला परिषद (TTAADC) के अंतर्गत आने वाली 587 ग्राम समितियों की कुल 4,597 सीटों में से यह जीत हासिल हुई है। ये ग्राम समितियाँ सामान्य क्षेत्रों की ग्राम पंचायतों के बराबर होती हैं और इन पर 10 साल बाद चुनाव हो रहे हैं।
निर्विरोध जीती गईं सीटें और चुनावी मैदान
त्रिपुरा राज्य निर्वाचन आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि नामांकन वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद टिपरा मोथा पार्टी ने 1,557 सीटें (33.87%) बिना किसी मुकाबले के जीत ली हैं। वहीं, भाजपा के खाते में 81 सीटें (1.76%) आई हैं।
इन निर्विरोध जीतों के बाद अब राज्य के 44 ब्लॉकों की बची हुई 2,954 सीटों पर ही मतदान होगा। विभिन्न दलों के 1,069 उम्मीदवारों द्वारा नाम वापस लेने के बाद अब कुल 9,820 उम्मीदवार मैदान में हैं। इनमें सबसे अधिक 4,279 उम्मीदवार टिपरा मोथा के हैं। इसके बाद माकपा के 2,151, भाजपा के 1,853 और कांग्रेस के 425 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
चुनाव पूर्व हिंसा और आरोप-प्रत्यारोप
चुनावों की घोषणा के साथ ही राज्य के विभिन्न हिस्सों से तनाव और हिंसा की खबरें भी सामने आ रही हैं। सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा होने के बावजूद, इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (IPFT) के वरिष्ठ नेता और मंत्री शुक्ला चरण नोतिया ने अपनी ही सहयोगी पार्टी टिपरा मोथा पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
नोतिया ने एक बयान में कहा कि 8 सितंबर को खोवाई जिले में IPFT के महासचिव स्वपन देबबर्मा पर टिपरा मोथा के समर्थकों ने "क्रूर हमला" किया। उन्होंने कहा, "इस तरह की घटनाएं गठबंधन की एकता की भावना को नुकसान पहुंचाती हैं।" वहीं, विपक्षी दलों सीपीआई (एम) और कांग्रेस ने भी आरोप लगाया है कि हमलों और धमकियों के कारण उनके कई उम्मीदवार नामांकन तक दाखिल नहीं कर पाए। वाम मोर्चा के संयोजक माणिक डे ने कहा कि चुनाव आयोग से शिकायत के बावजूद हिंसा रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।
इनपुट: IANS



