आखिर रेप की घटनाओं पर क्यों नहीं खौलता भारत का ख़ून

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बलात्कार किसी एक देश की महिलाओं की समस्या नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया की महिलाएं इस समस्या से जूझ रही है. अमेरिका, कनाडा, स्वीडन और ब्रिटेन जैसे विकसित देशों में बलात्कार जैसी घटनाएं ज्यादा होती है और भारत भी इससे अछूता नहीं है. दुनिया भर में लगभग 36 फीसदी महिलाएं शारीरिक या यौन हिंसा की शिकार बन रही है.

देश हो या फिर विदेश जहां पर हर 21 मिनट में बलात्कार जैसी घटना होती है, वहां भयंकर से भयंकर अपराध को भी लोग जल्द से जल्द भूल जाते है. इसकी यादें बची रहती हैं तो सिर्फ़ पीड़ित के परिवार वालों या सगे-संबंधियों के दिलों में, उन्हें न्याय के लिए भी अकेले ही लंबी लड़ाई लड़नी पड़ती है, और ज़्यादातर ऐसे मामलों में न्याय भी नहीं मिल पाता है.

युवतियों के साथ इस तरह कि घटना को लेकर देश भर में गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ता है और इतना ही नहीं इन्साफ की गुहार लगाने लगते है, हंगामा करने लगते है, ऐसे कई मामले है जिन्हें लेकर कुछ समय तक तो बहुत अधिक हंगामा किया जाता है, लेकिन धीरे-धीरे वो लोगों इस हादसे को भूल जाते है. बलात्कार की कई ऐसी कई दर्दनाक घनटाएं है. जिसके बावजूद भी अभी तक कड़े कानून नहीं बनाए गए है.

शायद ही लोगों को याद हो अरूणा शानबाग के बारें में जिसका रेप किया गया था और अपराधी के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं किया गया था, बल्कि उस पर हत्या और लूटपाट का मामला दर्ज कर उसे सात साल की सजा दी गई थी.

साल 2002 में हुए गुजरात दंगों के दौरान मुस्लिम औरतों के बलात्कार के काफ़ी मामले सामने आए हैं.

साल 2003 में दो लोगों ने राजधानी दिल्ली के दक्षिणी इलाक़े में एक राजनयिक को उनकी कार में ही घुसने को मजबूर किया. बाद में उनमें से एक ने उनके साथ बलात्कार किया.

मणिपुर में साल 2004 में असम राइफ़ल्स के जवान मनोरमा नाम की महिला को उनके घर से ये कहकर ले गए कि वो चरमपंथियों की मदद कर रही हैं. कुछ घंटों के बाद उनका छत-विक्षत शरीर सड़क के किनारे मिला.

उत्तर प्रदेश के एक पुलिस स्टेशन में पिछले साल ही सोनम नाम की एक 14 साल की लड़की का बलात्कार कर उसका क़त्ल कर दिया गया.

छत्तीसगढ़ में सोनी सोढ़ी नाम की आदिवासी महिला को पुलिस ने अक्टूबर 2011 से माओवादियों के संदेशवाहक होने के नाम पर बंद कर रखा है. जिसके बाद उसके साथ बलात्कार की घटना को अंजाम दिया.

10 जनवरी 2018 से शुरू हुई थी जब कुठआ ज़िले के रसाना गांव की आठ साल की बकरवाल लड़की अपने घोड़ों को चराने गई थी और वापस नहीं लौटी. जिस मामले से सभी लोग रूबरू हैं. जिसके बाद निर्भया, दिशा और उन्नाव रेप केस, हालफिहाल में हुआ बिहार का मामला.

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बलात्कार से जुडे़ केवल यही मामले नहीं और भी ऐसे मामले है. जिसके बाद भी अब तक सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं लिया है. लेकिन सरकार हमेशा दावे करती है कि लड़कियों के लिए कड़े सुरक्षा की जा रही है. तो ऐसे में अब सवाल यह उठता है कि सरकार की इतनी सख्ती बरतने के बाद भी ऐसे हालत क्यों. क्यों लड़कियां आए दिन ऐसी खौफनाक घटना का शिकार हो रही?