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संत सूरदास ने क्यों मांगा भगवान श्री कृष्ण से अंधा होने का वरदान ?

हमारे देश में अनेंक विद्वानों ने जन्म लिया. जिन्होंने ना सिर्फ भारत बल्कि जिनके विचारों को सुनकर विदेशों में भी लोग उनके रस्ते पर चले.

संत सूरदास ने क्यों मांगा भगवान श्री कृष्ण से अंधा होने का वरदान ?

हमारे देश में अनेंक विद्वानों ने जन्म लिया. जिन्होंने ना सिर्फ भारत बल्कि जिनके विचारों को सुनकर विदेशों में भी लोग उनके रस्ते पर चले. भारत में सूरदास जी भक्तिकाल के एक बहुत ही महान् कवि हुए हैं. इन्होंने अपने साहित्य में भगवान श्री कृष्ण की उपासना की तथा इसका साहित्य हिंदी भाषा में लिखा गया. इसके अलावा इनके द्वारा लिखे गए साहित्य की वजह से ही इनको हिंदी साहित्य का सूर्य भी माना जाता है. इसी कारण लोगों के मन में उनके जीवन से जुड़े हुए कई रोचक तथ्यों के बारे में जिज्ञासा होती है. इसी तरह का एक सवाल जो आमतौर पर पूछा जाता है कि सूरदास ने क्यों मांगा भगवान श्री कृष्ण से अंधा होने का वरदान ? अगर आपके मन में भी ऐसा ही सवाल है, तो इस पोस्ट में इसी सवाल का जवाब जानते हैं.

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संत सूरदास

संत सूरदास -

हिंदी साहित्य महान् कवि संत सूरदास जी के जन्म के बारे में माना जाता है कि इनका जन्म 1478 ईं. में हुआ था. इनका जन्म हरियाणा के फरीदाबाद जिले के सीही गांव में हुआ. हालांकि इस पर कुछ विद्वान इस बात से सहमत नहीं है. उनका मानना है कि उनका जन्म आगरा के पास रूंकटा में हुआ था. उनके साहित्यों और कविताओं के चाहने वालों की सूची में मुगल बादशाह अकबर भी आते थे. इसी वजह से वे संत सूरदास के संरक्षक भी बन गए. उन्होंने अपने साहित्य को ब्रज भाषा में लिखा.

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संत सूरदास

क्यों मांगा भगवान श्री कृष्ण से अंधा होने का वरदान -

ऐसा माना जाता है कि संत सूरदास जी भगवान श्री कृष्ण की भक्ति में बहुत डूबे हुए थे. एक बार वह एक कुएं में जा गिरे. जिसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने खुद उनकी जान बचाई. उनकी जान बचाने के साथ ही भगवान ने उनकी आँखों की रोशनी भी लौटा दी. जब संत सूरदास की नेत्र ज्योति लौटी , तो उन्होंने सबसे पहले अपने अराध्य देव श्री कृष्ण भगवान को देखा. इसके बाद भगवान ने खुश होकर उनसे वरदान मांगने को कहा. संत सूरदास जी जिस भगवान श्री कृष्ण की पूजा करते थे, वो साक्षात् मिलने के बाद उनको और किस चीज की जरूरत थी. उनको तो सबकुछ पहले से ही मिल चुका था. लेकिन भगवान के कहने पर उन्होंने भगवान से कहा कि आप मुझे वरदान में अंधा बना दीजिएं. मैने इस दुनिया में सिर्फ आपको देखा है और आपके अलावा में किसी को देखना भी नहीं चाहता है. इसलिए हे प्रभु मुझे अंधा ही बना दीजिएं.

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हालांकि इस बात पर भी विद्वानों में संदेह है कि संत सूरदास जी जन्म से अंधे थे या नहीं. लेकिन फिर भी समाज में कुछ प्रचलित मान्यताएं होती है. लेकिन जो भी हो, संत सूरदास की रचनाओं में कृष्ण के प्रति अटूट प्रेम और भक्ति का वर्णन मिलता है. इन रचनाओं में वात्सल्य रस, शांत रस, और श्रंगार रस शामिल है. इसके साथ ही संत सूरदास जी की लीलाओं का वर्णन भी हमें देखने को मिल जाता है.

Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य जानकारी पर आधारित हैं. News4social इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें।

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KJ

Kapil Jakhar

कपिल जाखड़ News4Social के कंटेंट राइटर हैं। वे समसामयिक घटनाक्रम, फ़ीचर और सामान्य ज्ञान से जुड़े विषयों पर लिखते हैं, और जानकारी को सरल व तथ्यपरक भाषा में प्रस्तुत करने पर ज़ोर देते हैं। सभी लेख देखें →

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