भगवान राम ने क्यों सुनाई थी हनुमान जी को मौत की सजा ?

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हनुमान जी
हनुमान जी

भगवान राम और हनुमान जी का प्रिय भक्त और स्वामी का रिस्ता था. हनुमान जी ने हमेशा भगवान राम की भक्ति की तथा जब भी भगवान राम के सामने कोई समस्या आई तो हनुमान जी ने ही उनको समस्या से बाहर निकाला. लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि भगवान राम और हनुमान जी के बीच भी किसी बात को लेकर या कोई ऐसी घटना हुई जिसके कारण भगवान राम ने हुनुमान जी को मौत की सजा सुनाई थी. जी हां, आप सही सुन रहे हैं ऐसी भी मान्यता है कि एक समय पर भगवान राम में हनुमान जी को मौत की सजा सुनाई थी.

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हनुमान जी

अगर हनुमान जी को मौत की सजा सुनाने के पीछे के कारण की बात करें, तो इसके पीछे एक रहस्य था. ऐसा माना जाता है कि एक बार नारद जी के कहने पर हनुमान जी ने विश्वामित्र को छोडकर बाकि सभी संतो का स्वागत किया. इसके पीछे कारण था कि विश्वामित्र भी एक समय पर राजा हुआ करते थे.

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हनुमान जी

हनुमान द्वारा संतो के साथ स्वागत ना करने पर विश्वामित्र को लगा कि उनका अपमान किया गया है. इस कारण वो नाराज हो गए. नाराज होने के बाद विश्वामित्र ने राम से हनुमान जी को मृत्युदंड देने के लिए कहा. आप जानते हैं कि विश्वामित्र जी भगवान राम के गुरू थे. जिसके कारण भगवान राम उनके आदेश को टालना नहीं चाहते थे.

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इसी कारण भगवान राम जी ने हनुमान पर तीर से प्रहार किया, लेकिन हनुमान जी राम नाम का जाप करने लगे. जिससे सभी तीर वापस लौट गए. इसके बाद रामजी ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग भी किया. जिसके बाद भी हनुमान जी रामजी का स्मरण करते रहे. ब्रह्मास्त्र भी हनुमान जी की परिक्रमा करने के बाद वापस चला गया. इस तरह अपनी भक्ति से प्रसन्न होकर श्री राम ने हनुमान जी को मौत की सजा सुनाने का फैसला बदल लिया.