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जानिए देश का 'मेट्रोमैन' किसे कहा जाता है?

ई श्रीधरन पेशे से सिविल इंजीनियर हैं। भारत में उन्हें ‘मेट्रो मैन’ के नाम से भी जाना जाता है।

जानिए देश का 'मेट्रोमैन' किसे कहा जाता है?

ई श्रीधरन पेशे से सिविल इंजीनियर हैं। भारत में उन्हें ‘मेट्रो मैन’ के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा इस लिए क्यूंकि उन्होंने अपने नेतृत्व में ‘कोंकण रेलवे’ और ‘दिल्ली मेट्रो’ का निर्माण कर भारत में जन यातायात को बदल दिया। दक्षिण रेलवे में अपनी पोस्टिंग के दौरान 1964 में एक चक्रवात ने पम्बबन ब्रिज को गंभीर रूप से क्षति पहुंचाई थी। इसी ब्रिज के माध्यम से रामेश्वरम तमिलनाडु से जुड़ा था। ये एक बड़ा नुकसान था। रेलवे ने पुल की मरम्मत के लिए छह महीने का लक्ष्य निर्धारित किया। उस दौरान श्रीधरन को इस कार्य के लिए 90 दिन का समय दिया गया और वे उस शामे लगभग 32 साल के थे। 90 दिनों की इस अवधि के कार्य को उन्होंने कुल 46 दिनों के भीतर पूरा कर लिया। इसके चलते उन्हें रेलवे मिनिस्टर की ओर से सम्मानित भी किया गया।

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12 जून 1932 को केरल के पलक्कड़ में पत्ताम्बी नामक स्थान पर हुआ था। उनके परिवार का सम्बन्ध पलक्कड़ के ‘करुकपुथुर’ से है। उनकी प्रारंभिक शिक्षा पलक्कड़ के ‘बेसल इवैंजेलिकल मिशन हायर सेकेंडरी स्कूल’ से हुई जिसके बाद उन्होंने पालघाट के विक्टोरिया कॉलेज में दाखिला लिया। उसके पश्चात उन्होंने आन्ध्र प्रदेश के काकीनाडा स्थित ‘गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज’ में दाखिला लिया जहाँ से उन्होंने ‘सिविल इंजीनियरिंग’ में डिग्री प्राप्त की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद कुछ समय तक श्रीधरन ने कोझीकोड स्थित ‘गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक’ में सिविल इंजीनियरिंग पढ़ाया। उसके बाद लगभग एक साल तक उन्होंने बॉम्बे पोर्ट ट्रस्ट में बतौर प्रसिक्षु कार्य किया। इसके पश्चात सन 1953 में वे भारतीय लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित ‘इंडियन इंजीनियरिंग सर्विसेज एग्जाम’ में बैठे और उत्तीर्ण हो गए।

दक्षिण रेलवे में अपनी सेवा देने के बाद वे उन्होंने देश की पहली मेट्रो की सफलता में अहम भूमिका निभाई। 1970 में इ. श्रीधरन ने भारत की पहली मेट्रो रेल ‘कोलकाता मेट्रो’ की योजना, डिजाईन और कार्यान्वन की जिम्मेदारी उठाई। श्रीधरन ने नाही सिर्फ इस परियोजना को पूरा किया बल्कि इसके द्वारा भारत में आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर इंजीनियरिंग की आधारशिला भी रखी। 1975 में उन्हें कोलकाता मेट्रो रेल परियोजना से हटा लिया गया।

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जुलाई 1987 में उन्हें पदोन्नत कर पश्चिमी रेलवे में जनरल मैंनेजर बना दिया गया और जुलाई 1989 में वे रेलवे बोर्ड का सदस्य बना दिए गए। जून 1990 में उनको सेवानिवृत्त होना था पर सरकार ने उनको बता दिया था कि देश को उनकी सेवाओं की और आवश्यकता है। इस प्रकार सन 1990 में उन्हें कॉन्ट्रैक्ट पर लेकर कोंकण रेलवे का चीफ मैनेजिंग डायरेक्टर बना दिया गया।

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Shashwat

शशवत News4Social के वरिष्ठ संवाददाता हैं। वे राष्ट्रीय घटनाक्रम, ताज़ा समाचार और सामान्य ज्ञान से जुड़े विषयों पर लिखते हैं, और जटिल जानकारी को सरल व तथ्यपरक भाषा में पाठकों तक पहुँचाने पर ज़ोर देते हैं। सभी लेख देखें →

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