राजस्थान का कौन -सा मंदिर सपनो का मंदिर के तौर पर प्रख्यात?

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राजस्थान भव्य और विशाल मंदिरो का गाढ़ मन जाता है। देश विदेश से लोग राजस्थान के अद्भुत मंदिरो के दर्शन के लिए आते है। इन में से एक है जगन्नाथराय का मंदिर यानि की स्वयं भगवान विष्णु का अवतार जगदीश मंदिर जो पुराने उदयपुर शहर के मध्य में स्थित है। इस मंदिर को उदयपुर के महाराणा जगत सिंह प्रथम द्वारा 1652 में निर्मण करवाया गया था। आप जानकर चौक जायेगे की इस भव्य मंदिर के निर्माण में तकरीबन 25 साल का लम्बा वक़्त लगा था।

इस मंदिर को बनवाने के पीछे यह कथा है की महाराजा जगत सिंह की जगन्नाथ पुरी के विष्णु भगवान के भक्त थे। एक दिन सपने में उन्हें साक्षात भगवान विष्णु के दर्शन हुए जिन्होंने राजा को उदयपुर में जगन्नाथराय का मंदिर बनवाने का आदेश दिया। और साथ ही यह भी बोला की भगवन जगदीश वहीं आकर वास करेंगे। इसी सपने के बाद इस मंदिर का निर्माण शुरू हुआ। यह मंदिर सपनो का मदिर के तोर पर भी प्रख्यात है। आपको बता दे की मंदिर आधार तल से 125 फीट ऊंचाई पर है। इसका शिखर 100 फीट ऊंचा है। मंदिर में कुल 50 कलात्मक स्तंभ से लैस हैं। इस मंदिर में जो प्रतिमा स्थापित है, वह राजस्थान के डूंगरपुर के पश्वशरण पर्वत से लाई गई थी। गर्भ गृह में काले पत्थर की सुंदर विष्णु प्रतिमा स्थापित की गई है। इस मंदिर को जागृत मंदिर माना जाता है। मंदिर परिसर में एक शिलालेख भी स्थित है, जो गुहिल राजाओं के बारे में जानकारी प्रदान करता है।

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आपको साथ ही यह भी बता दे कि इस मंदिर की नक्काशी में गजथर, अश्वथर तथा संसारथर दर्शाया गया है। मुगल बादशाह औरंगजेब ने सन 1736 में आक्रमण किया था। जिसके कारण वश इस मंदिर का अगला हिस्सा टूट गया। इसके गजथर के कई हाथी तथा बाहरी द्वार के पास का कुछ भाग आक्रमणकारियों ने तोड़ डाला था। इसके बाद महाराणा संग्राम सिंह द्वितीय द्वारा इस विशाल मंदिर की मरम्मत कराई गयी। यह मान्यता भी काफी प्रख्यात है की इस मंदिर में स्वयं भगवन विष्णु वास करते है।