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जानिए किस धर्म की उत्पत्ति भारत में नहीं हुई?

धर्म के नाम पर हजारों धर्म धर्म ऐसे थे जिनमें प्रकृति, पूर्वजों और कई काल्पिनिक देवों की पूजा करते थे। हर कबीले या समूदाय का अपना अलग देव था।

जानिए किस धर्म की उत्पत्ति भारत में नहीं हुई?

धर्म के नाम पर हजारों धर्म धर्म ऐसे थे जिनमें प्रकृति, पूर्वजों और कई काल्पिनिक देवों की पूजा करते थे। हर कबीले या समूदाय का अपना अलग देव था। लेकिन जैसे जैसे समझ बढ़ी तो धर्म का विकास होने लगा। नियम बनने लगे और सभ्यता की शुरुआत हुई।आइये जानते हैं किस धर्म की उत्पत्ति भारत में नहीं हुई है --

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यहूदी धर्म- इसराइल का राजधन यहूदी धर्म है। वैसे दो यहूदी धर्म भी हिन्दू धर्म की ही तरह पहले से ही चली आ रही प्राचीन परंपरा का ही एक सुगठित रूप है। इसका प्रारंभ 2000 ईसा पूर्व से माना जाता है। इसका प्रारंभ मूलत: प्रॉफेट अब्राहम से हुआ। फिर प्रॉफेट मूसा के काल में इस धर्म को एक नई शक्ल प्रदान की गई। यही नई शक्ल यहूदी धर्म कहलाई। मूसा मिस्र के फराओ के जमाने में हुए थे। प्रॉफेट अब्राहम धर्म में से ईसाई और इस्लाम धर्म की उत्पत्ति हुई।

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जरथुस्त्र (पारसी) धर्म- इस धर्म की स्थापना प्रॉफेट जरथुस्त्र ने फारस (वर्तमान में ईरान) में की थी। यह प्राचीन ईरान का राजधर्म था। इतिहासकारों का मत है कि जरथुस्त्र 1700-1500 ईपू के बीच हुए थे। यह लगभग वही काल था, जबकि राजा सुदास का आर्यावर्त में शासन था और दूसरी ओर हजरत इब्राहीम अपने धर्म का प्रचार-प्रसार कर रहे थे। ईरान में पारसी, ग्नोस्तिसिस्म, याज्दानिस्म अहल ई हक्क प्रचनल में था लेकिन वर्तमान में शिया और सूफी धर्म प्रचलन में हैं जो इस्लाम को मानने वाले हैं।

वूडू धर्म- इसे पूरे अफ्रीका का धर्म माना जा सकता है। कै‍रिबीय द्वीप समूह में आज भी यह परंपरा जिंदा है। इसे यहां वूडू कहा जाता है। बनीन देश का उइदा गांव वूडू बहुल क्षेत्र है। इसे लगभग 6,000 वर्ष से भी ज्यादा पुराना धर्म माना जाता है। ईसाई और इस्लाम धर्म के प्रचार-प्रसार के बाद इसके मानने वालों की संख्या घटती गई और आज यह पश्चिम अफ्रीका के कुछ इलाकों में ही सिमटकर रह गया है।

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कंफ्यूशियस धर्म- चीन के महान दार्शनिक और विचारक कंफ्यूशियस (confucius) का जन्म 551 ईसा पूर्व (28 अगस्त या सितंबर) को चीन के पूर्वी प्रांत शानडोंग (शान तुंग) के क्यूफू (छ्वी फु) शहर में हुआ था। भारत में उस काल में भगवान महावीर और बुद्ध के विचारों का जोर था। यह धर्म को मानने वाले अनुयायियों की चीन में संख्या बहुत कम थी।

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Shashwat

शशवत News4Social के वरिष्ठ संवाददाता हैं। वे राष्ट्रीय घटनाक्रम, ताज़ा समाचार और सामान्य ज्ञान से जुड़े विषयों पर लिखते हैं, और जटिल जानकारी को सरल व तथ्यपरक भाषा में पाठकों तक पहुँचाने पर ज़ोर देते हैं। सभी लेख देखें →

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