स्वतंत्र भारत में पहला व्यक्तिगत ओलंपिक पदक किस खिलाड़ी ने जीता ?
ओलंपिक खेल में पदक जीतने का सपना हर खिलाड़ी का होता है. ओलंपिक को खेलों की सबसे बड़ी प्रतियोगिता माना जाता है. ये खेल 4 साल में एक बार आयोजित करवाए जाते हैं.
ओलंपिक खेल में पदक जीतने का सपना हर खिलाड़ी का होता है. ओलंपिक को खेलों की सबसे बड़ी प्रतियोगिता माना जाता है. ये खेल 4 साल में एक बार आयोजित करवाए जाते हैं. जिनमें विभिन्न खेलों की अनेंक प्रतियोगिताओं का आयोजन करवाया जाता है.

किसी भी खिलाड़ी के लिए ओलंपिक का मैडल जीतना एक सपने के सच होने जैसा होता है. इसमें तीन तरह के पदक दिए जाते हैं. प्रथम स्थान पर आने वाले को स्वर्ण पदक , दूसरे स्थान पर आने वाले को रजत पदक तथा तीसरे स्थान पर आने वाले को कांस्य पदक से सम्मानित किया जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं आजादी के बाद या स्वतंत्र भारत में देश को पहला व्यक्तिगत ओलंपिक पदक किस खिलाड़ी ने जीता था ?

स्वतंत्र भारत में पहला व्यक्तिगत ओलंपिक पदक-
स्वतंत्र भारत में पहला व्यक्तिगत पदक खशाबा दादासाहेब जाधव (K.D जाधव) ने जीता था. यह पदक उन्होंने 1952 में हेलसिंकी में हुए ओलंपिक खेलों में हासिल किया था. इन्होंने फ्री स्टाइल कुश्ति में तीसरा स्थान प्राप्त किया. इस ओलंपिक खेलों में ये 52 किलोग्राम भार वर्ग में शामिल थे. भारत ने खशाबा दादासाहेब जाधव से पहले भी ओलंपिक में पदक हासिल किया था परंतु वह हाकी की टीम ने जीता था. व्यक्तिगततौर पर इन्होंने ही भारत को पहला पदक दिलाया था.
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इससे पहले 1948 में हुए ओलंपिक खेलों में भी K.D जाधव ने भाग लिया था. लेकिन उस समय वो 6 वें पायदान पर रहे तथा भारत को पदक नहीं दिला पाए थे. इनका जन्म 15 जनवरी , 1926 को महाराष्ट्र के गुलेश्वर नामक गांव में हुआ था. जब भी देश में ओलंपिक खेलों में पदक की बात आती है, तो उनके इस योगदान को कभी नहीं भूलाया जा सकता.
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