भारत का सबसे बड़ा किसान संगठन कौन सा है?

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भारत का सबसे बड़ा किसान संगठन कौन सा है?

केंद्र सरकार भले ही दावा कर रही हो कि उसने किसानों की खुशहाली के लिए बहुत काम किए हैं लेकिन किसानों में असंतोष बरकरार है. पिछले दो महीनों से ज्यादा समय से चल रहा किसानों का आंदोलन नये पड़ाव पर पहुंच गया है.कृषि कानूनों को लेकर किसानों का विरोध प्रदर्शन जारी है। बुधवार को किसानों ने केंद्र सरकार के ड्राफ्ट प्रस्ताव को नामंजूर कर दिया है। वहीं किसान संगठनों की तीनों कानून वापस लेने की मांग सरकार को मंजूर नहीं है। ऐसे में आंदोलन अब आर-पार हो चला है। किसानों ने अब आंदोलन और तेज करने, हाइवे जाम करने और मंत्रियों के घेराव करने की चेतावनी दी है।

साथ ही राष्ट्रव्यापी बंद बुलाकर किसानों ने केंद्र को आंख दिखाई थी। कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली बॉर्डर पर जमा किसानों के आंदोलन की बागडोर पंजाब के कुछ किसान संगठनों ने हाथ में है। इन संगठनों ने ही किसानों की आवाज उठाकर पंजाब से दिल्ली तक कृषि आंदोलन की धार तेज कर केंद्र की टेंशन बढ़ाई है। साथ ही सर्द मौसम में भी किसानों को डटे करने की हिम्मत दी है।

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भारतीय किसान यूनियन उग्राहन काडर की संख्या के हिसाब से भारत का यह सबसे बड़ा किसान संगठन है। 12 जिलों में इसकी शाखा है जिनमें मालवा क्षेत्र इनका गढ़ माना जाता है। जोगिंदर सिंह उग्राहन इसके अध्यक्ष हैं। जोगिंदर उन किसान नेताओं में शामिल हैं जिन्हें हाल ही में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कॉल किया था।

इस आंदोलन बढ़चढ़ कर हिस्सा ले रहे किसान नेता बीएम सिंह का कहना है कि ‘नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने से पहले किसानों से बड़े बड़े वादे किए थे. लेकिन वास्तव में उन्होंने किसानों को छला है. किसान की आय बढ़ाने का दावा झूठा है. किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं. हम सालों से यही मांग कर रहे हैं कि किसानों का कर्ज माफ हो, न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाया जाए और फसलों का उचित दाम सुनिश्चित किया जाए.’

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स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव ने कहा, ‘सरकार ऐसी गाय है जो पांच साल में एक बार दूध देती है और वह दूध देने का सीजन आ गया है. अगर इस बार गाय ने दूध नहीं दिया तो फिर पांच साल आप लात खाएंगे.’

उन्होंने कहा, ‘हम संसद के सामने दो मांगें रखेंगे कि किसानों को उनकी उपज का दाम गारंटी के साथ मिले. दूसरा, किसानों को कर्ज से मुक्त किया जाए. जाती हुई संसद के सामने हम ये दो मांग रखेंगे. अगर यह नहीं होता है तो किसान सरकार को सबक सिखाने का काम करेंगे.’

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