मंगलवार, 14 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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भगवान के पुराने वस्त्रों का क्या करें?

वृंदावन में भगवान की मूर्तियों के लिए पोशाकें तैयार की जाती हैं, जिनकी कीमत 3,000 से 30 लाख रुपये तक होती है। पुरानी पोशाकों को जल में विसर्जित कर दिया जाता है।

भगवान के पुराने वस्त्रों का क्या करें?

भगवान के पुराने वस्त्रों की बात करें उससे पहले हम ये जानते हैं की वृंदावन में कमोबेश हर भगवान के विग्रह की पोशाक तैयार की जाती है. इनमें श्री कृष्ण, श्री राम, भगवान शंकर, गणेश जी, प्रभु लक्ष्मी नारायण के अलावा कुछ जोड़ियां जैसे राधा-कृष्ण, राम-सीता ,शंकर-पार्वती और दुर्गा, सरस्वती, लक्ष्मी जैसी देवियां भी शामिल हैं.दुनिया भर से लोग इन्हें खरीदनें के लिए वृंदावन पहुंचते हैं. इनमें बहुत बड़ी तादाद उन विदेशियों की है जो हिंदू संस्कृति को अपना चुके हैं.

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धर्म नगरी वृंदावन में सैकड़ों की संख्या में ठाकुर जी की पोशाक सिलने वाली दुकानें मौजूद है जहां आप अपने भगवान के लिए तीन हजार से लेकर तीस लाख रुपये तक की पोशाक आसानी से सिलवा सकते हैं. शहर भर में रेजाना लगभग 30-40 लाख रुपये तक की एक हजार से ज्यादा पोशाकों की बिक्री होती है.

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औसतन एक फीट के विग्रह के लिए साधारण सी पोशाक चार हजार रुपये में खरीदी जा सकती है. अब यह आप पर निर्भर है कि आप अपने भगवान की ड्रेस पर कितने रत्न-जवाहरात जडवाना चाहते हैं. जितने रत्न-जवाहरात, उतनी ही महंगी पोशाक. जानकार बतातें हैं कि यह एक ऐसा व्यवसाय है जो शुरू होते ही लाभ देने लग जाता है.

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यह भगवान की सेवा करने वालों पर निर्भर करता है कि वे अपने भगवान की पोशाक कितनी बार बदलवाते हैं. त्यौहार और अवसर विशेष पर तो एक ही दिन में तीन चार बार विग्रहों की पोशाक और श्रंघार को बदला जाता है. आम तौर पर गौर पूर्णिमा अर्थात होली, कृष्ण जन्मोत्सव, राधाष्टमी और दीपावाली पर तो ठाकुर जी की पोशाक बदलवानी अनिवार्य है. ध्यान देने वाली बात है कि भगवान के कपड़ों को कभी धोया नहीं जाता और खराब हो जाने पर उन्हें पानी में विसर्जित कर दिया जाता है.

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Shashwat

शशवत News4Social के वरिष्ठ संवाददाता हैं। वे राष्ट्रीय घटनाक्रम, ताज़ा समाचार और सामान्य ज्ञान से जुड़े विषयों पर लिखते हैं, और जटिल जानकारी को सरल व तथ्यपरक भाषा में पाठकों तक पहुँचाने पर ज़ोर देते हैं। सभी लेख देखें →

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