सोमवार, 13 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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रुद्राक्ष माला में 108 दाने से जप की क्या मान्यता है?

हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार माला के 108 दाने और सूर्य की कलाओं का गहरा संबंध है.

रुद्राक्ष माला में 108 दाने से जप की क्या मान्यता है?

हिन्दू धर्म की मान्यता के अनुसार माला के 108 दाने और सूर्य की कलाओं का गहरा संबंध है. एक वर्ष में सूर्य 216000 कलाएं बदलता है और वर्ष में दो बार अपनी स्थिति भी बदलता है. छह माह उत्तरायण रहता है और छह माह दक्षिणायन अत: सूर्य छह माह की एक स्थिति में 108000 बार कलाएं बदलता है.

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इसी संख्या 108000 से अंतिम तीन शून्य हटाकर माला के 108 मोती निर्धारित किए गए हैं. माला का एक-एक दाना सूर्य की एक-एक कला का प्रतीक है. सूर्य ही व्यक्ति को तेजस्वी बनाता है, समाज में मान-सम्मान दिलवाता है. सूर्य ही एकमात्र साक्षात दिखने वाले देवता हैं, इसी वजह से सूर्य की कलाओं के आधार पर दानों की संख्या 108 निर्धारित की गई है.

rudraksha

माला में 108 दाने रहते हैं. इस संबंध में शास्त्रों में दिया गया है कि.

षट्शतानि दिवारात्रौ सहस्राण्येकं विशांति.

एतत् संख्यान्तितं मंत्रं जीवो जपति सर्वदा..

इस श्लोक के अनुसार एक पूर्ण रूप से स्वस्थ व्यक्ति दिनभर में जितनी बार सांस लेता है, उसी से माला के दानों की संख्या 108 का संबंध है. सामान्यत: 24 घंटे में एक व्यक्ति करीब 21600 बार सांस लेता है. दिन के 24 घंटों में से 12 घंटे दैनिक कार्यों में व्यतीत हो जाते हैं और शेष 12 घंटों में व्यक्ति सांस लेता है 10800 बार.

इसी समय में देवी-देवताओं का ध्यान करना चाहिए. शास्त्रों के अनुसार व्यक्ति को हर सांस पर यानी पूजन के लिए निर्धारित समय 12 घंटे में 10800 बार ईश्वर का ध्यान करना चाहिए लेकिन यह संभव नहीं हो पाता है इसीलिए 10800 बार सांस लेने की संख्या से अंतिम दो शून्य हटाकर जप के लिए 108 संख्या निर्धारित की गई है. इसी संख्या के आधार पर जप की माला में 108 दाने होते हैं.

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ज्योतिष के अनुसार ब्रह्मांड को 12 भागों में विभाजित किया गया है. इन 12 भागों के नाम मेष, वृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुंभ और मीन हैं. इन 12 राशियों में नौ ग्रह सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु विचरण करते हैं. अत: ग्रहों की संख्या 9 का गुणा किया जाए राशियों की संख्या 12 में तो संख्या 108 प्राप्त हो जाती है.

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एक अन्य मान्यता के अनुसार ऋषियों ने माला में 108 दाने रखने के पीछे ज्योतिषी कारण बताया है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुल 27 नक्षत्र बताए गए हैं. हर नक्षत्र के 4 चरण होते हैं और 27 नक्षत्रों के कुल चरण 108 ही होते हैं. माला का एक-एक दाना नक्षत्र के एक-एक चरण का प्रतिनिधित्व करता है.जो भी व्यक्ति माला की मदद से मंत्र जप करता है उसकी मनोकामनएं बहुत जल्द पूर्ण होती हैं. माला के साथ किए गए जप अक्षय पुण्य प्रदान करते हैं.

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Shashwat

शशवत News4Social के वरिष्ठ संवाददाता हैं। वे राष्ट्रीय घटनाक्रम, ताज़ा समाचार और सामान्य ज्ञान से जुड़े विषयों पर लिखते हैं, और जटिल जानकारी को सरल व तथ्यपरक भाषा में पाठकों तक पहुँचाने पर ज़ोर देते हैं। सभी लेख देखें →

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