रविवार, 12 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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प्रवीण नेट्टारू हत्याकांड: दो साल से फरार चल रहे दो मुख्य आरोपी गिरफ्तार, NIA को मिली बड़ी सफलता

कर्नाटक के चर्चित प्रवीण नेट्टारू हत्याकांड में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को एक बड़ी सफलता मिली है। एजेंसी ने दो साल से फरार चल रहे दो प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक

प्रवीण नेट्टारू हत्याकांड: दो साल से फरार चल रहे दो मुख्य आरोपी गिरफ्तार, NIA को मिली बड़ी सफलता
(फोटो: IANS)

कर्नाटक के चर्चित प्रवीण नेट्टारू हत्याकांड में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को एक बड़ी सफलता मिली है। एजेंसी ने दो साल से फरार चल रहे दो प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन दोनों की गिरफ्तारी केरल के कोच्चि और तमिलनाडु के होसुर से एक सुनियोजित अभियान के तहत शनिवार को की गई।

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गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान अब्दुल नासिर और नौशाद के रूप में हुई है। इन दोनों पर भारतीय जनता पार्टी युवा मोर्चा के नेता प्रवीण नेट्टारू के हत्यारों को जानबूझकर पनाह देने का आरोप है। NIA ने बताया कि आंध्र प्रदेश पुलिस से मिली एक विश्वसनीय सूचना के आधार पर यह संयुक्त कार्रवाई की गई। इन गिरफ्तारियों के साथ ही मामले में हिरासत में लिए गए लोगों की कुल संख्या 24 हो गई है। हालांकि, तीन आरोपी अब भी फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।

मामले की पृष्ठभूमि

प्रवीण नेट्टारू, जो भाजपा युवा मोर्चा के जिला कार्यकारी समिति के सदस्य थे, की 26 जुलाई, 2022 को दक्षिण कन्नड़ जिले के बेल्लारे में बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। यह घटना उस समय हुई जब राज्य में 'हिजाब' को लेकर विवाद चरम पर था। इस हत्या के बाद पूरे कर्नाटक में प्रतिशोध और चाकूबाजी की कई घटनाएं हुई थीं।

कानूनी कार्रवाई और इनाम

NIA ने अब्दुल नासिर और नौशाद के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप पत्र दायर किया था। बेंगलुरु स्थित NIA की विशेष अदालत ने दोनों के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) और गिरफ्तारी वारंट भी जारी किए थे। एजेंसी ने उनकी सूचना देने वाले के लिए प्रति व्यक्ति 4 लाख रुपए के इनाम की घोषणा भी की थी। NIA के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बाकी बचे फरार आरोपियों को पकड़ने के लिए प्रयास लगातार जारी हैं। जांच में यह बात सामने आई थी कि यह हत्या प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े 'हत्यारे गिरोहों' द्वारा सांप्रदायिक आतंक फैलाने और अशांति भड़काने के उद्देश्य से की गई एक सोची-समझी साजिश थी।

इनपुट: IANS

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