जानिये क्या है हीट वेव (लू) और इसके प्रकोप से बचने के उपाय

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गर्मियों में जब हवा त्वचा को जला दे या जब आग की तरह हवा बहे और वह सहने लायक न हो तो उसे ‘हीट वेव’ लू कहते हैं। लू गर्मियों में ज्यादा चलती है। मैदानी इलाकों में लू का कहर ज्यादा रहता है। हमेशा हर साल सुनने में आता है गर्मियों में लू लगने की वजह से लोगो की मौत हो गयी है। जब हवा हमारे त्वचा पर थपेड़ों की तरह लगती है तो पूरा शरीर सिहिर जाता है। गर्मियों में ज्यादातर लोग लू से ज्यादा मरते हैं और गर्मी से कम। सबसे ज्यादा लू से कालरा, हैजा और पेचिस होता है।

लू से होने वाली बीमारियों से बचने का उपाय है कि आप ब्लड प्रेशर पर नज़र रखें। हीट स्ट्रोक किसी को भी हो सकता है। ठंडे पानी से नहाएं। चिकन का ज्यादा न करें। फल और सब्ज़ियों को भोज़न में ज़्यादा शामिल करें। हीट वेव कोई मज़ाक नहीं है। घर से बाहर निकलते समय मुँह को ढककर चलें।

मानव शरीर का तापमान सामान्यता 37° डिग्री सेल्सियस होता है, इस तापमान पर ही हमारे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम कर पाते है। पसीने के रूप में पानी बाहर निकालकर शरीर 37° सेल्सियस टेम्प्रेचर मेंटेन रखता है, लगातार पसीना निकलते वक्त भी पानी पीते रहना अत्यंत ज़रुरी और आवश्यक है। पानी शरीर में इसके अलावा भी बहुत कार्य करता है, जिससे शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालना बंद कर देता है। जब बाहर का टेम्प्रेचर 45° डिग्री के पार हो जाता है और शरीर की कूलिंग व्यवस्था ठप्प हो जाती है, तब शरीर का तापमान 37° डिग्री से ऊपर पहुँचने लगता है। शरीर का तापमान जब 42° सेल्सियस तक पहुँच जाता है तब खून गरम होने लगता है और खून मे उपस्थित प्रोटीन पकने लगता है, ठीक उसी तरह से जैसे उबलते पानी में अंडा पकता है।

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एक बिना प्रयोग की हुई मोमबत्ती को कमरे से बाहर या खुले मे रखें, यदि मोमबत्ती पिघल जाती है, तो ये गंभीर स्थिति है। बैडरूम और अन्य कमरों में 2 आधे पानी से भरे ऊपर से खुले पात्रों को रख कर कमरे की नमी बरकरार रखी जा सकती है। अपने होठों और आँखों को नम रखने का प्रयत्न करें।