उत्तर प्रदेश में क्या-क्या चीज मशहूर है?
उत्तर प्रदेश का नाम आते ही कानून व्यवस्था और क्षेत्रवाद व जातिवाद से भरी राजनीति जहन में आती होगी।
उत्तर प्रदेश का नाम आते ही कानून व्यवस्था और क्षेत्रवाद व जातिवाद से भरी राजनीति जहन में आती होगी। गर्मी के दिनों में यहां की चिलचिलाती धूप और ठंड में जमा देने वाली सर्दी। ये सब तो आम बात हैं, लेकिन यूपी के बारे में ऐसी खास बातें भी हैं, जो शायद आप नहीं जानते होंगे।उत्तर भारत का एक ऐसा राज्य जिसे 1 अप्रैल 1937 में कुछ खास कारणों को ध्यान में रखते हुए एक राज्य बनाया गया था। यह एक ऐसा राज्य है जो भारत में होने वाली किसी भी बात या घटना पर सबसे ज्यादा सुखिर्यों में रहता है।
दुनिया के सात अजूबों में शामिल आगरा का ताजमहल उत्तर प्रदेश में ही है. यहां आपको जरूर घूमना चाहिए. देश-दुनिया से लोग यहां घूमने के लिए आते हैं. ताजमहल पहुंचने के लिए आप रोडवेज की बसों का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसके साथ ही आप आगरा पहुंचने के लिए ट्रेन का इस्तेमाल कर सकते हैं.आगरा जिले में ही फतेहपुर सीकरी है. फतेहपुर सीकरी को पहले फतहाबाद के नाम से जाना जाता था जो कि फारसी शब्द फतह से प्राप्त होता है जिसका अर्थ है विजय. शहर के निर्माण का उद्देश्य सूफी संत सलीम चिश्ती के सम्मान में अकबर ने करवाया था. यहां पहुंचने के लिए आप हवाई मार्ग से आगरा पहुंच सकते हैं.

अगर आप प्रकृति से जुड़ना चाहते हैं तो आपको उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में जरूर जाना चाहिए. यहां स्थित कतर्निया वन्यजीव अभयारण्य बेहद खूबसूरत जगह है. दुधवा टाइगर रिजर्व से जुड़ा होने के कारण यहां आपको चीता देखने को भी मिल जाएगा. कतर्निया 550 वर्ग किलोमीटर में फैला है.उत्तर प्रदेश का इलाहाबाद जिला हाईकोर्ट और विश्वविद्यालय से ज्यादा अपने दो नदियों के संगम के लिए मशहूर है. यहां यमुना और गंगा का संगम होता है. हिंदुओं के लिए यह बेहद धार्मिक स्थल है. 2019 में यह महाकुंभ का भी साक्षी बना. इलाहाबाद के संगम को घूमने का सबसे अच्छा समय जनवरी से मार्च रहेगा.
भगवान बुद्ध का जुड़ाव श्रावस्ती से रहा है. उत्तर प्रदेश के श्रावस्ती जिले में महामंकोल चाई थाई मोनेस्टरी है. आपको बता दें कि यह जितनी घूमने के लिए अच्छी जगह है उतनी ही शांति वाली जगह है. ध्यान लगाने वाले बौद्ध भिक्षु यहां आते हैं. यहां आने के लिए आप बलरामपुर जिले से और बहराइच जिले से बस के द्वारा इकौना और कटरा तक आ सकते हैं.
यह राज्य, राजनीति से लेकर आर्थिक मुद्दे में भी सबसे आगे रहता है। सारी दुनिया में उत्तर प्रदेश को आगरा के ताजमहल, लखनऊ की नज़ाकत, बनारस के घाट, कनपुरिया मिज़ाज, इलाहबाद के संगम आदि के कारण जाना जाता है। उत्तर प्रदेश की राजकीय भाषा हिन्दी है और यहां के लोग, हिन्दी के ही अलग-अलग रूपों को बोलते हैं। यहां आपसी बातचीत में गालियों का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन कोई बुरा नहीं मानता है।
भारत सरकार का चिन्ह् मौर्य सम्राट अशोक के द्वारा उत्तर प्रदेश के वाराणसी के निकट सारनाथ में बनवाया गया था, जिसे 1947 के बाद भारत सरकार ने अपना चिन्ह् बना लिया था। यूपी के बारे में यह बात बहुत प्रसिद्ध है। यहां हर कोस यानि तीन किमी. पर पानी का स्वाद बदल जाता है और हर ढाई कोस पर भाषा बदल जाती है। एक ही जिले में थोड़ी-थोड़ी दूरी पर भाषा के फर्क को यहां आकर साफ तौर पर समझा जा सकता है।
करमांसा एक भारत की एक ऐसी नदी है, जिसमें पानी है, लेकिन लोग इसका पानी छूने या इस्तेमाल करने से कतराते हैं, उनका मानना है इसे छूने से उनका काम बेकार हो जाएगा। इस नदी के आसपास रूकने वाले लोग भी यहां सिर्फ ड्राईफूट्रस खाकर रहते हैं, क्योकि उन्हे लगता है कि खाना बनाने में इसका पानी इस्तेमाल करना होगा।

इत्र यूपी के कन्नौज जिले में इत्र भारी मात्रा में बनाया जाता है। अगर आप कभी इस शहर से गुजरे तो गुलाबों की खुशबु हवा में आसानी से महसूस की जा सकती है। यहां के खेतों में फसल से ज्यादा फूलों जैसे - गुलाब, गेंदा और मेंहदी की पैदावार होती है।
पारिजात वृक्ष पारिजात वृक्ष, लखनऊ से 40 किमी. की दूरी पर है, जो सारी दुनिया में अपनी तरह का अलग वृक्ष है। इस वृक्ष को इसके फूलों के लिए जाना जाता है जो हर दिन अपना रंग बदलते हैं। लोग मानते है कि भगवान कृष्ण की दूसरी पत्नी के लिए यह वृक्ष स्वर्ग से आया था।
तम्बाकू-बीड़ी यूपी में भारत की सबसे ज्यादा तम्बाकू और बीड़ी बनाई जाती है। यहां के कासंगज इलाके में तम्बाकू की खेती उच्च स्तर पर होती है और गुरसहायगंज इलाके के हर घर में सिर्फ बीड़ी बनाने का काम होता है। यहां से सारी दुनिया को इन नशीले पदार्थो को भेजा जाता है।
बनारस बनारस, विश्व का सबसे प्राचीन शहर है। कहा जाता है कि एक जमाने में यहां लोग आपसी बातचीत भी शास्त्रों की भाषा में किया करते थे, इसीकारण वहां की भाषा और संस्कृति बेहद समृद्ध है।
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