कान पर चंदन लगाने का क्या अर्थ है ?
हिंदू परंपरा में त्रिपुंड (चंदन की तीन रेखाएं) केवल माथे पर नहीं बल्कि शरीर के 32 अंगों पर लगाया जाता है। कानों पर चंदन लगाने से रुद्र और ब्रह्मा देवता की कृपा मिलती है, जो बहुत शुभ माना जाता है।
ललाट अर्थात माथे पर भस्म या चंदन से तीन रेखाएं बनाई जाती हैं उसे त्रिपुंड कहते हैं. आप में से ज्यादात्तर लोग सोच रहें होंगें कि चंदन से बनी ये तीन रेखाएं सिर्फ माथे पर ही बनाई जाती हैं. त्रिपुंड हमारे शरीर के कुल 32 अंगों पर लगाया लगाया जा सकता है.

अगर इन अंगों की बात करें तो इनमें मस्तक, ललाट, दोनों कान, दोनों नेत्र, दोनों कोहनी, दोनों कलाई, हृदय, दोनों पाश्र्व भाग, नाभि, दोनों अण्डकोष, दोनों अरु, दोनों गुल्फ, दोनों घुटने, दोनों पिंडली और दोनों पैर शामिल हैं. इनमें अग्नि, जल, पृथ्वी, वायु, दस दिक्प्रदेश, दस दिक्पाल और आठ वसुओं वास करते हैं. सभी अंगों का नाम लेकर इनके उचित स्थानों में ही त्रिपुंड लगना उचित होता है.

सभी अंगों पर अलग-अलग देवताओं का वास होता है. जैसे- मस्तक में शिव, केश में चंद्रमा ठीक उसी तरह दोनों कानों में रुद्र और ब्रह्मा जी का वास होता है. शिवजी भगवान का पौराणिक नाम रूद्र है. इस तरह अगर हम हमारे दोंनों कानों पर चंदन लगाते हैं. तो इससे रूद्र देवता और ब्रह्मा देवता की कृपा हमारे ऊपर बनी रहती है.
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कानों पर चंदन लगाना बहुत ही शुभ माना जाता है. चंदन से बनी तीन रेखाएं यानी की त्रिपंड को हम माथे के अलावा भी शरीर के काफी अंगों पर लगा सकते हैं. जिसका अपना विशेष महत्व रहता है. सभी अंग अलग-अलग देवताओं से संबंधित होते हैं. इसलिए हमें माथे के अलावा भी चंदन का प्रयोग करना चाहिए. जो बहुत शुभ होता है.



