कांग्रेस सरकार ने किसानों के लिए क्या किया था?
कांग्रेस ने किसानों के लिए कहा की देश में किसानों की आत्महत्या की घटनाओं में लगातार वृद्धि पर चिंता जताते हुए बुधवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा ने…
कांग्रेस ने किसानों के लिए कहा की देश में किसानों की आत्महत्या की घटनाओं में लगातार वृद्धि पर चिंता जताते हुए बुधवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भाजपा ने किसानों को लागत का डेढ़ गुना दिलाने का वादा पूरा नहीं किया तथा किसानों के ऋण माफ करने के स्थान पर उद्योगपतियों के करोड़ों रुपये का ऋण माफ कर दिया गया.कांग्रेस प्रवक्ता आरपीएन सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि 2014 के आम चुनाव के समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य एमएसपी के पर लागत के आधे के बराबर मूल्य दिलाने का वादा किया था.

उन्होंने कहा कि आज जिन जिन राज्यों में भाजपा की सरकार वहां किसानों की हालत देख लीजिए. मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, झारखंड एवं उत्तर प्रदेश में किसानों की स्थिति देख लीजिए. कहीं उन पर गोलियां चलाई जाती हैं, तो कहीं उनके कपड़े उतार कर उनको पीटने का काम करते हैं.सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश में हाल में हमने देखा कि किस तरह से किसान मजबूर होकर अपनी आलू की फसलें सरकारी भवनों पर, विधानसभा के बाहर फेंक रहे हैं.

कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में अन्न की आपूर्ति को भरोसेमंद बनाने और किसानों की आर्थिक हालत को बेहतर करने के मकसद को लेकर 2004 में केंद्र सरकार ने एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में राष्ट्रीय किसान आयोग का गठन किया. इसे स्वामीनाथन रिपोर्ट कहा जाता है. इस आयोग ने अपनी रिपोर्ट 4 अक्टूबर, 2006 में सौंपी गई लेकिन इस रिपोर्ट में जो सिफारिशें हैं उन्हें अभी तक लागू नहीं किया जा सका है.

यूपीए ने की बैंक के कर्ज पर कर्जमाफी यूपीए सरकार ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की बजाय किसानों की कर्जमाफी का ऐलान कर दिया. फरवरी 2008 में चुनाव से पहले यूपीए सरकार ने किसानों की ऋण माफ करने की नीति का ऐलान किया. इस स्कीम के तहत किसानों के 70 हजार करोड़ रुपये के ऋण माफ किए जाने थे. इस स्कीम का फायदा उन किसानों के लिए था, जिन्होंने बैंकों से खेती के लिए ऋण लिए थे. कांग्रेस का दावा है कि इससे साढे तीन करोड़ किसानों का कर्ज माफ हुआ लेकिन 10 साल हो जाने के बावजूद किसानों की हालत में कोई सुधार नहीं हुआ.
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