बुधवार, 1 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
राजनीति

महबूबा मुफ्ती ने भारत-पाकिस्तान बातचीत पर फिर दिया जोर, कहा- जम्मू-कश्मीर को शांति का पुल बनाएँ

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और बातचीत की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर क

महबूबा मुफ्ती ने भारत-पाकिस्तान बातचीत पर फिर दिया जोर, कहा- जम्मू-कश्मीर को शांति का पुल बनाएँ
(फोटो: IANS)

जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच व्यापार, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और बातचीत की पुरजोर वकालत की है। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को "जंग का अखाड़ा" नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच "अमन का पुल" बनना चाहिए। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, महबूबा मुफ्ती ने यह बात दोनों देशों की 117 प्रमुख हस्तियों द्वारा अपने-अपने प्रधानमंत्रियों को लिखे गए एक संयुक्त खुले पत्र का समर्थन करते हुए कही।

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श्रीनगर में सोमवार को महबूबा मुफ्ती ने कहा कि उनकी पार्टी (पीडीपी) हमेशा से मानती रही है कि संवाद ही भारत और पाकिस्तान के बीच की दूरियों को कम करने का एकमात्र समाधान है। उन्होंने कहा, "लोगों को इस पहल और इस पत्र के बारे में जानकारी लेनी चाहिए, क्योंकि मौजूदा हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। इसका असर सिर्फ जम्मू-कश्मीर के लोगों पर ही नहीं, बल्कि पूरे देश पर पड़ रहा है।"

वाजपेयी का कथन और PM की विरासत

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रसिद्ध कथन "दोस्त बदले जा सकते हैं, लेकिन पड़ोसी नहीं" का जिक्र करते हुए मुफ्ती ने कहा कि किसी भी प्रधानमंत्री की असली विरासत उसकी ताकत या सत्ता में बने रहने से नहीं, बल्कि विवादों को सुलझाने से तय होती है। उन्होंने कहा कि आज दोनों देशों के नेताओं के पास रिश्तों को सुधारने का एक सुनहरा अवसर है। इस संदर्भ में उन्होंने इस बात पर भी खुशी जताई कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के वरिष्ठ नेताओं ने भी दोनों देशों के बीच संवाद की जरूरत पर सकारात्मक बात कही है।

व्यापार और क्षेत्रीय सहयोग पर जोर

महबूबा मुफ्ती ने सुझाव दिया कि दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) को फिर से सक्रिय किया जाना चाहिए, जिसकी अगुवाई भारत को करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर को "सार्क सहयोग का एक मॉडल" बनाया जा सकता है, जहाँ सदस्य देश निवेश करें और क्षेत्र के विकास में भागीदार बनें। उन्होंने उत्तराखंड में लिपुलेख मार्ग खोले जाने का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि जब चीन की दिशा में संपर्क बढ़ाया जा सकता है, तो लद्दाख के रास्ते खोतान, यारकंद और काशगर जैसे पुराने मार्गों को क्यों नहीं खोला जा सकता। मुफ्ती के अनुसार, जम्मू-कश्मीर की भौगोलिक स्थिति भारत को मध्य एशिया और दक्षिण एशिया का प्रवेश द्वार बना सकती है, जिससे पूरे देश की अर्थव्यवस्था को फायदा होगा, लेकिन इसके लिए पाकिस्तान और चीन दोनों के साथ अच्छे संबंध जरूरी हैं।

अनुच्छेद 370 और मौजूदा हालात

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2019 में अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने के बावजूद जम्मू-कश्मीर की समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने दावा किया कि आज भी जम्मू-कश्मीर के लोग अलगाव की भावना का सामना कर रहे हैं और पूरा क्षेत्र एक "ओपन प्रिजन" (खुली जेल) जैसा महसूस करता है। मुफ्ती ने कहा कि 2019 के बाद लद्दाख में चीन के साथ भी तनाव बढ़ा है, इसलिए भारत को "बड़े दिल का परिचय देते हुए" दोनों पड़ोसियों से बातचीत करनी चाहिए।

इनपुट: IANS

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