बुधवार, 22 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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कल्याण बनर्जी के निलंबन पर TMC ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल, BJP ने की सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील

संसद के मानसून सत्र में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कल्याण बनर्जी के निलंबन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया है। जहाँ एक ओर TMC ने निलंबन की प्रक्रिया को संसदीय नियमों के विरुद्ध…

कल्याण बनर्जी के निलंबन पर TMC ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल, BJP ने की सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील
(फोटो: IANS)

संसद के मानसून सत्र में तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कल्याण बनर्जी के निलंबन को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया है। जहाँ एक ओर TMC ने निलंबन की प्रक्रिया को संसदीय नियमों के विरुद्ध बताया है, वहीं भाजपा ने सदन की गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, TMC इस निलंबन को तत्काल वापस लेने की मांग कर रही है।

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निलंबन की प्रक्रिया पर TMC के सवाल

TMC सांसद सौगत रॉय ने निलंबन की पूरी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि जिस घटना को निलंबन का आधार बनाया जा रहा है, वह कल्याण बनर्जी और सांसद मिताली बाग के बीच कथित बहस थी। यह बहस उस समय हुई जब सदन की कार्यवाही स्थगित थी, माइक बंद थे और पीठासीन अधिकारी भी मौजूद नहीं थे। सौगत रॉय के अनुसार, ऐसी घटना को सदन की कार्यवाही का हिस्सा नहीं माना जा सकता।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बनर्जी को न तो कोई पूर्व सूचना दी गई और न ही उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया। रॉय ने कहा, "दोपहर करीब दो बजे सदन में हंगामे के बीच कार्यवाहक सभापति ने एक नोटिस पढ़कर कल्याण बनर्जी को पूरे शेष सत्र के लिए निलंबित करने की घोषणा की। सदन में शोर-शराबे के कारण अधिकांश सांसद यह समझ ही नहीं पाए कि सभापति क्या कह रहे थे।" उन्होंने स्पष्ट किया कि नियम 374(2) उस स्थिति में लागू नहीं होता जब सदन की कार्यवाही स्थगित हो। इस मुद्दे पर लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद उन्होंने बताया कि अध्यक्ष ने सत्ता पक्ष से चर्चा कर अगले दिन निर्णय देने की बात कही है, क्योंकि निलंबन का प्रस्ताव उन्हीं की ओर से आया था।

संसदीय आचरण और गतिरोध पर भाजपा का पक्ष

वहीं, भाजपा सांसद सुष्मिता देव ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजनीतिक मतभेद को व्यक्तिगत शत्रुता में नहीं बदलना चाहिए और सभी दलों को सदन की मर्यादा का पालन करना चाहिए। उन्होंने कहा, "लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी दलों को सदन की गरिमा और मर्यादा बनाए रखनी चाहिए।"

संसद में जारी गतिरोध पर सुष्मिता देव ने विपक्ष के बदलते रुख की आलोचना की। उनके अनुसार, "पहले विपक्ष ने चर्चा की मांग की, जिस पर सरकार और पीठासीन अधिकारी दोनों सहमत हो गए। लेकिन, बाद में विपक्ष ने पहले इस्तीफे की मांग रख दी और उसके बाद चर्चा की बात कही।" उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि संसद का मूल काम बहस और चर्चा से समस्याओं का समाधान खोजना है और यदि विपक्ष वास्तव में छात्रों के हितों को लेकर चिंतित है तो उसे सदन में चर्चा में हिस्सा लेना चाहिए।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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