ज्ञानवापी के सीलबंद वजूखाने में पूजा की अनुमति का मामला, सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई
वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर के उस हिस्से में पूजा की अनुमति मांगने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को सुनवाई के लिए तैयार हो गया है, जिसे 2022 से सील किया गया है। हिंदू पक्ष ने सावन के पवित्र…
वाराणसी के ज्ञानवापी परिसर के उस हिस्से में पूजा की अनुमति मांगने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट गुरुवार को सुनवाई के लिए तैयार हो गया है, जिसे 2022 से सील किया गया है। हिंदू पक्ष ने सावन के पवित्र महीने का हवाला देते हुए इस क्षेत्र में मौजूद शिवलिंग पर धार्मिक अनुष्ठान करने की इजाजत मांगी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, याचिकाकर्ताओं ने अदालत को यह भी आश्वासन दिया है कि वे सुरक्षा समेत सभी अदालती शर्तों का पूरी तरह पालन करेंगे।
यह मामला ज्ञानवापी मस्जिद परिसर के सीलबंद 'वजूखाना' क्षेत्र से जुड़ा है, जिसे सुप्रीम कोर्ट के एक अंतरिम आदेश के बाद से बंद रखा गया है। हिंदू पक्ष का दावा है कि इस क्षेत्र में शिवलिंग मौजूद है, जहां वे पूजा और जलाभिषेक करना चाहते हैं।
मामले की पृष्ठभूमि और हाल के घटनाक्रम
यह याचिका ऐसे समय में आई है जब हाल ही में इस महीने की शुरुआत में हिंदू और मुस्लिम दोनों पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट की "समाधान समारोह" पहल को औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया था। दोनों पक्षों ने आपसी बातचीत के बजाय नियमित न्यायिक प्रक्रिया के माध्यम से ही विवाद के निपटारे पर जोर दिया है।
गौरतलब है कि हिंदू पक्ष लगातार यह दावा करता रहा है कि ज्ञानवापी मस्जिद का निर्माण मुगल काल में एक मंदिर को ध्वस्त करके किया गया था। वहीं, मुस्लिम पक्ष का तर्क है कि यह मस्जिद कानूनी रूप से मान्यता प्राप्त एक वक्फ संपत्ति है।
'व्यास तहखाना' में पूजा की अनुमति
इससे पहले, जनवरी 2024 में वाराणसी की जिला अदालत ने हिंदू श्रद्धालुओं को ज्ञानवापी परिसर के दक्षिणी तहखाने, जिसे 'व्यास तहखाना' कहा जाता है, में पूजा करने की इजाजत दी थी। बाद में, ज्ञानवापी मस्जिद प्रबंधन समिति ने इस फैसले को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन हाईकोर्ट ने उनकी अपील खारिज कर दी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के जिला मजिस्ट्रेट को काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट के लिए पूजा की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश भी दिया था।
इनपुट: IANS



