शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
अपराध

यूनियन बैंक को ₹24.81 करोड़ का चूना: CBI ने विजयवाड़ा की स्टील कंपनी और उसके डायरेक्टरों पर केस दर्ज किया

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने विजयवाड़ा की एक निजी स्टील कंपनी और उसके चार डायरेक्टरों के खिलाफ यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के साथ कथित तौर पर 24.81 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में मामला दर्ज किया…

यूनियन बैंक को ₹24.81 करोड़ का चूना: CBI ने विजयवाड़ा की स्टील कंपनी और उसके डायरेक्टरों पर केस दर्ज किया
(फोटो: IANS)

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने विजयवाड़ा की एक निजी स्टील कंपनी और उसके चार डायरेक्टरों के खिलाफ यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के साथ कथित तौर पर 24.81 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी करने के आरोप में मामला दर्ज किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले में अज्ञात सरकारी कर्मचारियों और अन्य निजी व्यक्तियों को भी आरोपी बनाया गया है।

विज्ञापन

यह कार्रवाई यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के विजयवाड़ा जोनल ऑफिस के सहायक महाप्रबंधक चिनारी श्रीकांत पात्रो की लिखित शिकायत पर की गई है। सीबीआई की विशाखापत्तनम स्थित एंटी-करप्शन ब्रांच ने 18 अगस्त को यह एफआईआर दर्ज की, जिसमें मेसर्स ओमकारा विजयलक्ष्मी स्ट्रिप्स प्राइवेट लिमिटेड को मुख्य आरोपी बनाया गया है। कंपनी के डायरेक्टरों कोटा भानु प्रसाद, कोटा श्रावणी, कोटा पृथ्वी वेंकट तेजा और कोटा राहुल साई बालाजी के नाम भी एफआईआर में शामिल हैं।

कैसे हुई धोखाधड़ी?

जांच के अनुसार, कंपनी ने 2024 में बैंक से संपर्क किया था। उसने करूर वैश्य बैंक से अपने मौजूदा लोन को यूनियन बैंक में ट्रांसफर करने के लिए आवेदन दिया। आरोप है कि इस प्रक्रिया में कंपनी के डायरेक्टरों ने आपराधिक साजिश के तहत बैंक को गलत वित्तीय विवरण और जाली दस्तावेज सौंपे। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर बैंक ने 22 फरवरी 2024 को कंपनी के लिए 24.98 करोड़ रुपये की क्रेडिट सुविधा मंजूर कर दी।

सुरक्षा के तौर पर कंपनी ने स्टॉक, बुक डेट्स (बकाया राशि), प्लांट व मशीनरी के साथ-साथ कुछ अचल संपत्तियों को भी गिरवी रखा था। हालांकि, बाद में जब बैंक ने यूनिट का निरीक्षण किया तो स्टॉक में भारी गड़बड़ी पाई गई।

स्टॉक और बही-खातों में भारी हेरफेर

एफआईआर के मुताबिक, कंपनी ने दस्तावेजों में 23.85 करोड़ रुपये का स्टॉक दिखाया था, लेकिन मौके पर जांच के दौरान केवल 25 लाख रुपये का ही स्टॉक मिला। इसी तरह, 28 मई 2025 के स्टॉक स्टेटमेंट में 23.86 करोड़ रुपये की संपत्ति दिखाई गई, जबकि 27 जून 2025 के ऑडिट में असल कीमत सिर्फ 25 लाख रुपये निकली।

इसके अलावा, कंपनी ने अपने बही-खातों में दिखाए गए बकाए (बुक डेट्स) से जुड़े जरूरी दस्तावेज भी जमा नहीं किए। जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी ने टाटा कैपिटल फाइनेंशियल सर्विसेज से मिले 2.10 करोड़ रुपये के चैनल फाइनेंस की जानकारी भी बैंक से छिपाई थी।

फर्जी कंपनियों के जरिए लेनदेन का शक

बैंक की आंतरिक जांच में कई और अनियमितताएं भी सामने आई हैं। पता चला कि मारुति ट्रेडर्स और श्री दुर्गा भवानी स्टील्स नाम की दो फर्मों को बड़ी रकम ट्रांसफर की गई। ये दोनों फर्में 2024 में ही बनी थीं और जांच के समय सक्रिय भी नहीं थीं। जांचकर्ताओं को शक है कि इन कंपनियों का इस्तेमाल सिर्फ पैसे की हेराफेरी करने और टर्नओवर को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए किया गया था।

अंततः, ब्याज का भुगतान न होने पर बैंक ने 23 जून 2025 को इस खाते को नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (NPA) घोषित कर दिया। उस समय तक कंपनी पर ब्याज समेत कुल 26.05 करोड़ रुपये बकाया थे। बैंक को कुल 24.81 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।

इनपुट: IANS

N

News4Social क्राइम डेस्क

News4Social क्राइम डेस्क — IANS समेत लाइसेंस-प्राप्त समाचार एजेंसियों की फीड से अपराध और कानून से जुड़ी ताज़ा व प्रामाणिक खबरें संपादकीय समीक्षा के बाद प्रकाशित करता है। हर खबर उसके स्रोत के श्रेय (credit) के साथ दी जाती है। सभी लेख देखें →

आगे पढ़ें

और देखें →