शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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बांग्लादेश की आर्थिक मुश्किलें बढ़ीं, IMF ने सुधारों में देरी के चलते रोका कर्ज

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने बांग्लादेश के लिए ऋण की अगली किस्तों को फिलहाल रोक दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह फैसला वित्तीय सुधारों और जलवायु संबंधी उपायों को लागू करने में हुई देरी…

बांग्लादेश की आर्थिक मुश्किलें बढ़ीं, IMF ने सुधारों में देरी के चलते रोका कर्ज
(फोटो: IANS)

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने बांग्लादेश के लिए ऋण की अगली किस्तों को फिलहाल रोक दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह फैसला वित्तीय सुधारों और जलवायु संबंधी उपायों को लागू करने में हुई देरी के कारण लिया गया है। इस रोक से बांग्लादेश के मौजूदा 4.7 अरब डॉलर के ऋण कार्यक्रम पर असर पड़ा है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश सरकार न केवल इस कार्यक्रम को फिर से शुरू करवाना चाहती है, बल्कि बजटीय सहायता के लिए 2 अरब डॉलर का अतिरिक्त कर्ज भी मांग रही है। हालांकि, IMF ने किसी भी नए वित्तपोषण के लिए व्यापक आर्थिक सुधारों और जलवायु जोखिमों से निपटने की क्षमता को एक प्रमुख शर्त के रूप में रखा है।

आईएमएफ की प्रमुख शर्तें

आईएमएफ ने बांग्लादेश के सामने कई महत्वपूर्ण शर्तें रखी हैं। इनमें बैंकिंग क्षेत्र और संबंधित कानूनों में सुधार, राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड (NBR) की क्षमता बढ़ाना, और करदाताओं की जानकारी तक आसान पहुंच सुनिश्चित करना शामिल है। इसके अलावा, एजेंसी ने ईंधन और बिजली पर सब्सिडी खत्म करने के साथ-साथ बाजार आधारित विदेशी मुद्रा विनिमय दर लागू करने की भी मांग की है।

जलवायु जोखिम और वित्तीय स्थिरता

जलवायु परिवर्तन से जुड़े जोखिमों का आकलन और उनसे निपटने के लिए संस्थागत क्षमता का विकास भी एक अहम मुद्दा है। आईएमएफ की एक तकनीकी टीम ने हाल ही में 19 से 30 जुलाई तक ढाका का दौरा कर देश की जलवायु नीतियों, वित्तीय ढांचे और जोखिम प्रबंधन की समीक्षा की थी। आईएमएफ का मानना है कि ये सुधार देश की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण हैं।

उल्लेखनीय है कि बांग्लादेश एशिया का पहला देश था जिसे आईएमएफ की 'रिजिलियंस एंड सस्टेनिब्लिटी फैसिलिटी' (RSF) के तहत लगभग 1.4 अरब डॉलर का वित्तपोषण मिला था। इसमें से लगभग दो-तिहाई राशि जारी हो चुकी है, जबकि बाकी लंबित है। इन सुधारों में हो रही देरी से न केवल मौजूदा ऋण कार्यक्रम प्रभावित हो रहा है, बल्कि नए कर्ज पर भी अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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