उत्तराखंड के 'मॉडल निकाहनामा' को राष्ट्रीय मुस्लिम मंच का समर्थन, कहा- महिलाओं के अधिकार होंगे मज़बूत
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड द्वारा प्रस्तावित एक नए 'मॉडल निकाहनामा' के प्रारूप को राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने अपना समर्थन दिया है। मंच का मानना है कि यह पहल मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों, विशेषकर विरासत और…
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड द्वारा प्रस्तावित एक नए 'मॉडल निकाहनामा' के प्रारूप को राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने अपना समर्थन दिया है। मंच का मानना है कि यह पहल मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों, विशेषकर विरासत और विवाह से जुड़े सुरक्षा के मामलों को मज़बूत करने की क्षमता रखती है।
समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, मंच की राष्ट्रीय संयोजक डॉ. शालिनी अली ने इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि निकाहनामा एक कॉन्ट्रैक्ट होता है, जिसमें महिलाओं को अपनी सुरक्षा के लिए शर्तें शामिल करने का अधिकार है।
महिलाओं के अधिकार और सुरक्षा
डॉ. अली ने कहा, "शरिया के मुताबिक मुस्लिम महिलाओं का भी अपने पिता की संपत्ति में हिस्सा होता है। यूसीसी के तहत जो तैयारियां की जा रही हैं, उनका मकसद यह पक्का करना है कि सभी महिलाओं का सम्मान हो। उत्तराखंड में जो मॉडल निकाहनामा तैयार किया जा रहा है, उसका स्वागत किया जाना चाहिए।" उन्होंने आगे कहा कि कई लड़कियां बिना पढ़े निकाहनामे पर दस्तखत कर देती हैं, जबकि यह उनकी अपनी सुरक्षा के लिए होता है।
भविष्य की राह और विरोध पर टिप्पणी
डॉ. शालिनी अली ने बताया कि इस मॉडल निकाहनामे को यूसीसी कमेटी के सामने चर्चा के लिए रखा जाएगा और उलेमाओं से बातचीत के बाद ही इसे पेश किया जाएगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह पहल आने वाली पीढ़ियों की बेटियों को समर्थन देगी, उन्हें आगे बढ़ने का मौका देगी और सुरक्षित करेगी। उन्होंने कहा, "आगे चलकर यह मॉड्यूल सभी प्रदेशों में आना चाहिए।"
इस प्रस्ताव का विरोध करने वालों की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा, "जो इसे गलत बता रहे हैं, वे मौलाना हैं जो अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकते हैं।" उन्होंने कहा कि ऐसे मौलवियों की बातों पर ध्यान देने के बजाय बेटियों के जीवन को सुरक्षित बनाने पर विचार करना चाहिए।
इनपुट: IANS



