शेख हसीना की वापसी के ऐलान से डरी तारिक रहमान सरकार? भारत दौरे पर सस्पेंस
बांग्लादेश की अवामी लीग नेता शेख हसीना ने दिसंबर तक वतन वापसी का ऐलान किया है, और माना जा रहा है कि इसी घोषणा से प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार चिंतित है। बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्…
बांग्लादेश की अवामी लीग नेता शेख हसीना ने दिसंबर तक वतन वापसी का ऐलान किया है, और माना जा रहा है कि इसी घोषणा से प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार चिंतित है। बांग्लादेश में भारत की पूर्व उच्चायुक्त वीणा सिकरी के मुताबिक, अवामी लीग की बढ़ती लोकप्रियता के कारण ही ढाका और नई दिल्ली के बीच दूरियां बढ़ रही हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यही वजह है कि तारिक रहमान की सरकार भारत की तरफ से मिले निमंत्रण पर पिछले छह महीने से कोई जवाब नहीं दे रही है।
पूर्व राजनयिक वीणा सिकरी ने कहा कि रहमान सरकार भारत न आने के लिए शेख हसीना के प्रत्यर्पण को एक बहाना बना रही है, जबकि यह पूरी तरह से एक लंबी कानूनी प्रक्रिया है। उन्होंने बताया कि रहमान के प्रधानमंत्री बनते ही शेख हसीना के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो गई, जबकि विपक्ष में रहते हुए वह खुद पार्टियों पर प्रतिबंध लगाने के खिलाफ बोला करते थे।
भारत के न्योते पर बांग्लादेश की चुप्पी
वीणा सिकरी ने बताया, "प्रधानमंत्री तारिक रहमान को भारत आने का न्योता छह महीने पहले, फरवरी 2026 में दिया गया था, जब उन्होंने प्रधानमंत्री के तौर पर शपथ ली थी। मुझे लगता है कि भारत सरकार की तरफ से पीएम तारिक रहमान को प्रधानमंत्री बनने के बाद मिला पहला न्योता था, और हम छह महीने से जवाब का इंतजार कर रहे हैं।" उन्होंने यह भी बताया कि कुछ हफ्ते पहले भारत ने बिम्सटेक के चेयरमैन के तौर पर रहमान को ब्रिक्स समिट के लिए दूसरा न्योता भी दिया था।
विशेषज्ञों की राय
इस मामले पर अपनी राय रखते हुए मेजर जनरल (रिटायर्ड) ध्रुव कटोच ने स्पष्ट किया कि शेख हसीना का प्रत्यर्पण किसी भी हालत में नहीं होगा। उन्होंने कहा, "शेख हसीना ने यहां शरण ली है और जब तक वह चाहेंगी, वह यहीं रहेंगी। अगर बांग्लादेश, चीन-पाकिस्तान के साथ अपनी दोस्ती मजबूत करना चाहता है, तो यह उसकी मर्जी है। बस एक ही बात है कि उसे भारत के मामलों में दखल नहीं देना चाहिए।"
द्विपक्षीय संबंधों पर बांग्लादेश का पक्ष
वहीं, भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त एम. रियाज हमीदुल्लाह ने दोनों देशों के बीच समस्याओं को मिलकर काम करने का एक अवसर बताया। उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की एक चिट्ठी का जिक्र करते हुए कहा, "मैं उस चिट्ठी का जिक्र कर रहा हूं जो प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने 26 फरवरी को भारत सरकार को लिखा था, जहां पैराग्राफ तीन में तीन उदाहरण हैं। एक वह था जब उन्होंने कहा, 'आम लोगों की उम्मीदें' आम अंडरलाइन किया हुआ। वह आसानी से 'लोग' कह सकते थे। उन्होंने 'आम' का इस्तेमाल क्यों किया?" उन्होंने दोनों देशों के बीच 'सहयोग' से ज्यादा 'सहकारिता' पर जोर देने की बात कही।
इनपुट: IANS



