गुजरात: सिंचाई विभाग के 6 फर्जी दफ्तर बनाकर करोड़ों की सरकारी ग्रांट हड़पी, ED ने 22.70 करोड़ की संपत्ति जब्त की
गुजरात के दाहोद जिले में सिंचाई विभाग के नाम पर छह फर्जी सरकारी दफ्तर बनाकर करोड़ों रुपये का घोटाला करने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ईडी…
गुजरात के दाहोद जिले में सिंचाई विभाग के नाम पर छह फर्जी सरकारी दफ्तर बनाकर करोड़ों रुपये का घोटाला करने के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ईडी ने इस मामले में 22.70 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्तियां जब्त कर ली हैं। ये संपत्तियां मुख्य आरोपी अबूबकर जकीराली सैयद और उसके परिवार व सहयोगियों के नाम पर थीं।
ईडी ने यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के तहत की है। जब्त की गई संपत्तियों में जमीन के सात टुकड़े, म्यूचुअल फंड में किए गए निवेश और विभिन्न बैंक खातों में जमा रकम शामिल है। यह पूरा मामला दाहोद टाउन 'ए' डिवीजन पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR के आधार पर शुरू हुआ था।
कैसे किया गया यह अनोखा घोटाला?
ईडी की जांच में सामने आया कि आरोपियों ने एक संगठित तरीके से इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया। उन्होंने खुद को सरकारी अधिकारी बताकर, जाली मुहरों और हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इसी आधार पर उन्होंने सिंचाई और जल संसाधन विभाग के नाम पर छह नकली दफ्तर खोले।
इन फर्जी दफ्तरों के जरिए आरोपियों ने मिलीभगत करके 121 नकली कामों के लिए मंजूरी हासिल की और सरकारी अनुदान को धोखाधड़ी से प्राप्त कर लिया।
पैसों को खपाने के लिए बनाया खातों का जाल
रिपोर्ट के मुताबिक, घोटाले से हासिल किए गए पैसों को ठिकाने लगाने के लिए बैंक खातों का एक जटिल नेटवर्क इस्तेमाल किया गया। सबसे पहले यह रकम फर्जी सरकारी दफ्तरों के नाम पर खोले गए 9 बैंक खातों में जमा की गई। इसके बाद, फंड को 18 मध्यस्थ खातों (intermediary accounts) से होते हुए आरोपियों से जुड़े 118 अलग-अलग खातों में बांट दिया गया। बाद में इसी पैसे का इस्तेमाल संपत्तियां खरीदने, निवेश करने और अन्य कामों में किया गया।
ED ने आम लोगों को किया सावधान
इस मामले के संदर्भ में ईडी ने आम नागरिकों को भी आगाह किया है। एजेंसी ने लोगों को सलाह दी है कि वे छोटे-मोटे कमीशन या किसी भी आर्थिक लाभ के लालच में आकर अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड, चेक बुक या इंटरनेट बैंकिंग डिटेल्स किसी के साथ साझा न करें। एजेंसी ने बताया कि धोखेबाज ऐसे खातों का इस्तेमाल 'म्यूल अकाउंट' के तौर पर करते हैं, ताकि साइबर धोखाधड़ी और दूसरे घोटालों से मिले अवैध पैसे को इधर-उधर घुमाया जा सके। ईडी ने स्पष्ट किया कि भले ही खाताधारक सीधे तौर पर धोखाधड़ी में शामिल न हो, लेकिन किसी और को अपना खाता इस्तेमाल करने देना भी कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।
इनपुट: IANS



