तमिलनाडु: ब्रिटेन में पढ़ाई का सपना खतरे में? कनिमोझी ने UK वीजा नियमों को लेकर विदेश मंत्री से की हस्तक्षेप की मांग
तमिलनाडु के 300 से अधिक छात्रों के लिए ब्रिटेन के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर अधर में लटक गया है। राज्य सरकार की स्कॉलरशिप पर चयनित इन छात्रों को यूके वीजा मिलने…
तमिलनाडु के 300 से अधिक छात्रों के लिए ब्रिटेन के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर अधर में लटक गया है। राज्य सरकार की स्कॉलरशिप पर चयनित इन छात्रों को यूके वीजा मिलने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिसके समाधान के लिए डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर को पत्र लिखा है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, कनिमोझी ने इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।
यह पूरा मामला तमिलनाडु सरकार की 'अन्नल अंबेडकर ओवरसीज हायर एजुकेशन स्कॉलरशिप योजना' से जुड़ा है। इस योजना के तहत शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए 300 से ज्यादा छात्रों का चयन किया गया था। कनिमोझी ने अपने पत्र में बताया कि छात्रों को जुलाई के अंतिम सप्ताह में ही प्रायोजन पत्र (sponsorship letter) जारी कर दिए गए थे, लेकिन वीजा का मुद्दा अभी तक अनसुलझा है।
वीजा नियमों में बदलाव बनी समस्या की जड़
समस्या की मुख्य वजह यूके वीजा और इमिग्रेशन विभाग द्वारा 17 अप्रैल 2026 से लागू किए गए नए नियम बताए जा रहे हैं। इन नए प्रावधानों के तहत, ऐसी खबरें हैं कि तमिलनाडु सरकार द्वारा दी जा रही वित्तीय सहायता को वीजा प्रक्रिया में मान्यता नहीं दी जा रही है। सांसद ने बताया कि संबंधित अधिकारियों को इस बारे में सूचित किए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
खतरे में छात्रों का भविष्य
कनिमोझी ने इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की कि कई विश्वविद्यालयों में प्रवेश और नामांकन की अंतिम तिथियां अगस्त और सितंबर में ही हैं। उन्होंने कहा, "यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो छात्रों को अपनी मेहनत से प्राप्त प्रवेश और महत्वपूर्ण शैक्षणिक अवसर गंवाने पड़ सकते हैं, जबकि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है।"
अपने पत्र में उन्होंने विदेश मंत्रालय से आग्रह किया है कि वह ब्रिटिश सरकार और यूके वीजा विभाग के साथ तत्काल समन्वय स्थापित करे। उन्होंने मांग की कि तमिलनाडु सरकार के प्रायोजन को मान्यता देने के संबंध में स्पष्टता हासिल की जाए, ताकि किसी भी छात्र को प्रशासनिक बाधाओं के कारण विदेश में शिक्षा का अवसर न खोना पड़े।
इनपुट: IANS



