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जैन धर्म के अनुसार मुनिराज के पहले 108 क्यों लगाते है?
जैन धर्म में मुनिराज के नाम से पहले 108 लगाने के पीछे दो मुख्य कारण हैं - मनुष्य 108 प्रकार के पाप करता है और 108 ब्रह्म (आत्मा) का प्रतीक है। संस्कृत वर्णमाला में 'ब्रह्म' शब्द के अक्षरों की स्थिति का योग 108 होता है।

