अवैध निर्माणों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी, नगर निकायों के रवैये पर जताई गहरी चिंता
देशभर में लगातार हो रहे अवैध निर्माण और नगर निकायों की उदासीनता पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गुरुवार को एक सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि नगर निगमों द
देशभर में लगातार हो रहे अवैध निर्माण और नगर निकायों की उदासीनता पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरी नाराजगी जताई है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, गुरुवार को एक सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि नगर निगमों द्वारा अदालती आदेशों का पालन नहीं किया जा रहा है और कई जगहों पर अवैध निर्माण बेरोकटोक जारी हैं।
न्यायमूर्ति अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और न्यायमूर्ति शील नागू की पीठ ने विशेष रूप से दिल्ली नगर निगम (MCD) के ढुलमुल रवैये को लेकर फटकार लगाई। अदालत ने अपने 20 मई के आदेश का जिक्र करते हुए कहा कि लाजपत नगर और सरोजनी नगर जैसे इलाकों में अवैध निर्माण पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए थे, लेकिन सिर्फ नोटिस भेजकर खानापूर्ति कर दी गई।
कोर्ट के आदेशों की अनदेखी
न्यायमूर्ति अमानुल्लाह ने कहा, "हम दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के रवैये को लेकर खास तौर पर चिंतित हैं। अधिकारियों को क्या करना है, इस बारे में खास निर्देश दिए गए थे।" उन्होंने कहा कि नोटिस भेजने के बाद उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई और हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद एमसीडी की मिलीभगत से निर्माण कार्य चलता रहा। सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली में बिल्डिंग गिरने और मालवीय नगर में आग लगने जैसी घटनाओं को भी इसी लापरवाही का नतीजा बताया। कोर्ट ने टिप्पणी की कि जब अदालती आदेशों पर अधिकारी कार्रवाई नहीं करते, तो आम लोगों की स्थिति कितनी असहाय होगी।
विशेषज्ञ टीम करेगी जांच
अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम कदम उठाया है। अदालत ने आईआईटी दिल्ली के दो वरिष्ठ सिविल इंजीनियरिंग प्रोफेसरों और दो ड्राफ्ट्समैन की एक संयुक्त टीम बनाने का निर्देश दिया है। यह टीम एमसीडी अधिकारियों और एमिकस क्यूरी के साथ मिलकर दिल्ली के साकेत, लाजपत नगर और सरोजनी नगर का निरीक्षण करेगी और अवैध निर्माणों की वास्तविक स्थिति पर अपनी रिपोर्ट सीधे कोर्ट को सौंपेगी।
अन्य शहरों पर भी सख्त रुख
अदालत ने केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी नगर निकायों को चेतावनी दी है। गुरुग्राम में 93 प्रतिशत प्रतिष्ठानों के फायर सेफ्टी ऑडिट में विफल होने की रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए कोर्ट ने संबंधित नगर निकाय के उपाध्यक्ष को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया है। इसके अलावा, लखनऊ नगर निगम के आयुक्त को भी पेश होकर कार्रवाई का ब्योरा देने को कहा गया है। अदालत ने तमिलनाडु सरकार को भी ऐसे सभी मामलों में की गई कार्रवाई का विस्तृत ब्यौरा जमा करने का निर्देश दिया है।
इनपुट: IANS



