मंगलवार, 18 अगस्त 2026 · नई दिल्ली
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औद्योगिक कॉरिडोर: वित्त मंत्री का ज़ोर - सिर्फ़ निर्माण नहीं, निवेश और उत्पादन पर हो फ़ोकस

भारत के औद्योगिक गलियारों (Industrial Corridors) के विकास को लेकर केंद्र सरकार अब सिर्फ़ बुनियादी ढाँचे के निर्माण से आगे बढ़कर निवेश आकर्षित करने और उत्पादन शुरू करवाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है…

औद्योगिक कॉरिडोर: वित्त मंत्री का ज़ोर - सिर्फ़ निर्माण नहीं, निवेश और उत्पादन पर हो फ़ोकस
(फोटो: IANS)

भारत के औद्योगिक गलियारों (Industrial Corridors) के विकास को लेकर केंद्र सरकार अब सिर्फ़ बुनियादी ढाँचे के निर्माण से आगे बढ़कर निवेश आकर्षित करने और उत्पादन शुरू करवाने पर ध्यान केंद्रित कर रही है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सोमवार को नई दिल्ली में हुई एक उच्च-स्तरीय बैठक में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट निर्देश दिया कि ज़मीन आवंटन, निवेश और उत्पादन शुरू करना अब प्राथमिकता होनी चाहिए।

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यह बैठक नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट एंड इम्प्लीमेंटेशन ट्रस्ट (NICDIT) की शीर्ष निगरानी समिति की तीसरी बैठक थी, जिसकी अध्यक्षता वित्त मंत्री ने की। इसका मुख्य उद्देश्य नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डेवलपमेंट प्रोग्राम (NICDP) के तहत चल रही परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना और भविष्य की दिशा तय करना था।

निवेश और रोज़गार पर ज़ोर

वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा कि NICDP भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने और विश्व-स्तरीय औद्योगिक इकोसिस्टम तैयार करने की सरकारी रणनीति का एक अहम स्तंभ है। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे ज़मीन, कनेक्टिविटी, और कानूनी मंजूरियों से जुड़ी बाधाओं को तुरंत दूर करें। उन्होंने कहा कि मौजूदा ज़मीन और ढाँचे का उपयोग पूरा होने से पहले ही अगली परियोजनाओं की पाइपलाइन तैयार रखनी होगी। साथ ही, उन्होंने औद्योगिक विकास के साथ-साथ श्रमिकों के लिए आवास, स्वास्थ्य और कौशल विकास जैसी सामाजिक सुविधाओं की ज़रूरत पर भी बल दिया।

'प्लग-एंड-प्ले' मॉडल पर काम

बैठक में मौजूद केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 'प्लग-एंड-प्ले' बुनियादी ढाँचे वाले औद्योगिक इकोसिस्टम बनाने का आह्वान किया, जो निवेशकों के लिए पूरी तरह तैयार हों। इसमें फ़्लैटेड फ़ैक्ट्री, वर्कर हाउसिंग और अन्य सहायक सुविधाएँ शामिल होनी चाहिए। उन्होंने मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) का लाभ उठाकर देश और सेक्टर-आधारित औद्योगिक एन्क्लेव विकसित करने का सुझाव दिया।

बैठक में "भाव्या योजना" की भी समीक्षा की गई, जिसका लक्ष्य देश भर में 100 निवेश-तैयार औद्योगिक पार्क बनाना है। इस योजना में राज्यों की गहरी दिलचस्पी दिख रही है, क्योंकि पहले दौर के 20 प्रोजेक्ट के लिए 87 आवेदन मिल चुके हैं।

अब तक की प्रगति

NICDP के तहत अब तक 13 राज्यों और 7 औद्योगिक गलियारों में 20 परियोजनाएँ मंजूर की गई हैं। धोलेरा, शेंद्रा-बिडकिन, ग्रेटर नोएडा और विक्रम उद्योगपुरी जैसी चार औद्योगिक स्मार्ट सिटी में उत्पादन भी शुरू हो चुका है। आँकड़ों के मुताबिक, अब तक 469 प्लॉट आवंटित किए जा चुके हैं, जिनसे करीब 2.21 लाख करोड़ रुपए के निवेश और 1.29 लाख लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है। वर्तमान में 134 इकाइयाँ उत्पादन कर रही हैं और 95 निर्माणाधीन हैं।

अन्य मंत्रियों और अधिकारियों के सुझाव

वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए केंद्रीय बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने औद्योगिक गलियारों को राष्ट्रीय जलमार्गों से जोड़ने पर ज़ोर दिया। वहीं, नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि राज्य सरकारों को प्रोजेक्ट की विशेष इकाइयों (SPV) को पर्याप्त शक्तियाँ देनी चाहिए, ताकि फ़ैसले तेज़ी से हों। बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत कई राज्यों के मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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