ज्ञानवापी विवाद: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 14 जुलाई से मध्यस्थता की मेज़ पर हिंदू-मुस्लिम पक्ष
वाराणसी के ऐतिहासिक ज्ञानवापी मामले में अब एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इस दशकों पुराने विवाद को आपसी बातचीत से सुलझाने के लिए मध्यस्थता (मेडिएशन) की प्रक्रिया शुरू
वाराणसी के ऐतिहासिक ज्ञानवापी मामले में अब एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इस दशकों पुराने विवाद को आपसी बातचीत से सुलझाने के लिए मध्यस्थता (मेडिएशन) की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। समाचार एजेंसी IANS से मिली जानकारी के अनुसार, इस सिलसिले में पहली बैठक 14 जुलाई को तय की गई है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम, दोनों पक्षों के वादी और उनके वकील शामिल होंगे।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य न्यायालय के बाहर दोनों पक्षों के बीच एक आम सहमति बनाना है, ताकि लंबे समय से चल रहे मुकदमों का स्थायी समाधान निकल सके। यह प्रक्रिया सफल होती है या नहीं, यह दोनों पक्षों के रुख पर निर्भर करेगा।
सात मुकदमों पर एक साथ समाधान की कोशिश
मामले से जुड़े अधिवक्ता पंडित सुधीर त्रिपाठी ने बताया कि ज्ञानवापी से संबंधित सात अलग-अलग मुकदमों के समाधान के लिए यह मध्यस्थता की जा रही है। उन्होंने कहा, "इस संबंध में जिला स्तर पर नोटिस जारी किया गया है। ज्ञानवापी से जुड़े सात पत्रावलियों के संबंध में 9 जुलाई को सभी पक्षों को सूचना दी गई थी और अब 14 जुलाई को दोनों पक्षों को बुलाया गया है।" उनका मानना है कि अगर यह बातचीत सफल रही तो सभी लंबित मामलों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।
क्या हैं दोनों पक्षों की शर्तें और दलीलें?
मध्यस्थता को लेकर हिंदू पक्ष का रुख स्पष्ट है। उनका कहना है कि यदि मुस्लिम पक्ष बिना किसी शर्त के मंदिर सौंपने पर राजी हो जाता है, तभी वे इस मध्यस्थता को सफल मानेंगे। पंडित त्रिपाठी के मुताबिक, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के तीन महीने लंबे सर्वे में मंदिर के ढांचे पर मस्जिद बनाए जाने के पर्याप्त सबूत मिले हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर मंदिर पक्ष को सौंप दिया जाता है तो वे दूसरे पक्ष पर किसी तरह की सजा या जुर्माने की मांग नहीं करेंगे।
हालांकि, अगर आपसी बातचीत से कोई हल नहीं निकलता है, तो अदालत में चल रही कानूनी प्रक्रिया पहले की तरह जारी रहेगी। अधिवक्ता ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल मामले में कोई विशेष आदेश पारित करने पर रोक लगाई है और जिला स्तर पर अदालत के निर्देशों का ही पालन किया जा रहा है।
इनपुट: IANS



