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सुनीता विलियम्स: भारतीय मूल की वह अंतरिक्ष यात्री जिसने स्पेस में बिताए 600 से ज़्यादा दिन

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की सबसे अनुभवी अंतरिक्ष यात्रियों में गिनी जाने वाली सुनीता विलियम्स ने अपने करियर में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। वह कल्पना चावला के बाद अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय…

सुनीता विलियम्स: भारतीय मूल की वह अंतरिक्ष यात्री जिसने स्पेस में बिताए 600 से ज़्यादा दिन
(फोटो: IANS)

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की सबसे अनुभवी अंतरिक्ष यात्रियों में गिनी जाने वाली सुनीता विलियम्स ने अपने करियर में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। वह कल्पना चावला के बाद अंतरिक्ष में जाने वाली भारतीय मूल की दूसरी महिला हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सुनीता अब तक तीन मिशनों में कुल 608 दिन अंतरिक्ष में बिता चुकी हैं, जो उनकी असाधारण यात्रा को दर्शाता है।

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19 सितंबर 1965 को अमेरिका के ओहायो में जन्मी सुनीता का भारत से गहरा नाता है। उनके पिता डॉ. दीपक पांड्या गुजरात से हैं, जबकि उनकी माँ स्लोवेनियाई मूल की हैं। अंतरिक्ष में भगवदगीता और गणेशजी की मूर्ति ले जाकर उन्होंने अपनी भारतीय जड़ों को सम्मान दिया है।

नौसेना पायलट से नासा तक का सफर

नासा से जुड़ने से पहले सुनीता विलियम्स अमेरिकी नौसेना में एक कुशल हेलीकॉप्टर पायलट थीं, जिनके पास 30 से ज़्यादा तरह के विमानों पर 3,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव था। उन्होंने 1987 में यूनाइटेड स्टेट्स नेवल एकेडमी से फिजिकल साइंस में ग्रेजुएशन और 1995 में फ्लोरिडा इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग मैनेजमेंट में मास्टर्स की डिग्री हासिल की। साल 1998 में नासा ने उन्हें अंतरिक्ष यात्री के तौर पर चुना।

अंतरिक्ष में बनाए रिकॉर्ड

सुनीता ने अपनी पहली अंतरिक्ष उड़ान 9 दिसंबर 2006 को स्पेस शटल डिस्कवरी से की। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) पर अपने पहले मिशन में उन्होंने 195 दिन बिताए, जो उस समय किसी भी महिला द्वारा सबसे लंबा अंतरिक्ष प्रवास था। इस दौरान उन्होंने चार बार स्पेसवॉक भी किया।

उनकी दूसरी यात्रा 14 जुलाई 2012 को रूसी सोयुज यान से शुरू हुई, जिसमें उन्होंने ISS के एक अभियान की कमान संभाली और 127 दिन अंतरिक्ष में गुजारे। अब तक वह कुल 9 स्पेसवॉक कर चुकी हैं, जिसमें उन्होंने स्टेशन के बाहर 62 घंटे से ज़्यादा का समय बिताया है।

सबसे चुनौतीपूर्ण मिशन

सुनीता का तीसरा मिशन, जो 5 जून 2024 को बोइंग के स्टारलाइनर यान से शुरू हुआ, उनके करियर का सबसे चुनौतीपूर्ण साबित हुआ। यह मिशन सिर्फ़ आठ दिनों का था, लेकिन तकनीकी गड़बड़ियों के कारण उन्हें नौ महीने से ज़्यादा समय तक अंतरिक्ष स्टेशन पर ही रुकना पड़ा। अंततः, 18 मार्च 2025 को वह स्पेसएक्स के ड्रैगन कैप्सूल के ज़रिए सुरक्षित पृथ्वी पर लौट आईं।

इनपुट: IANS

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