सेमीकंडक्टर हब बनने की राह पर भारत, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 से 200 नई चिप डिजाइन कंपनियां उभरीं
भारत में स्वदेशी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को बढ़ावा देने की कोशिशें रंग ला रही हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सरकार के महत्वाकांक्षी इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (ISM 2.0) के तहत अब तक देश में करीब…
भारत में स्वदेशी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को बढ़ावा देने की कोशिशें रंग ला रही हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, सरकार के महत्वाकांक्षी इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (ISM 2.0) के तहत अब तक देश में करीब 200 चिप डिजाइन कंपनियां सामने आई हैं। केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इसे देश में सेमीकंडक्टर की अपनी बौद्धिक संपदा (Intellectual Property) विकसित करने की दिशा में एक बड़ा बदलाव बताया है।
इस मिशन के तहत 105 से ज़्यादा चिप डिजाइन स्टार्टअप्स को अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल्स तक पहुंच दी गई है। इनमें से 20 स्टार्टअप्स को वेंचर कैपिटल से फंडिंग भी मिली है।
प्रतिभा विकास और उत्पादन
अश्विनी वैष्णव ने जानकारी दी कि देश में पिछले चार सालों में लगभग 70,000 चिप डिजाइन इंजीनियरों को प्रशिक्षित किया गया है। सरकार का लक्ष्य इस संख्या को बढ़ाकर 85,000 तक ले जाना है। उन्होंने कहा, "वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनने के लिए उच्च गुणवत्ता और लागत प्रतिस्पर्धा दोनों जरूरी हैं।" मंत्री ने यह भी बताया कि इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के पहले चरण (ISM 1.0) के तहत स्वीकृत 12 इकाइयों में से पांच संयंत्रों ने व्यावसायिक उत्पादन शुरू कर दिया है।
वैश्विक साझेदारी और निवेश
हाल ही में हुए 'सेमिकॉन इंडिया 2026' कार्यक्रम में भारत की बढ़ती साख की पुष्टि हुई। वैष्णव ने बताया कि कार्यक्रम में दुनिया की प्रमुख सेमीकंडक्टर अर्थव्यवस्थाओं ने हिस्सा लिया और वैश्विक कंपनियों ने भारत के साथ सहयोग व निवेश बढ़ाने में गहरी रुचि दिखाई। भारत को एक विश्वसनीय देश के रूप में मान्यता मिल रही है और बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) की सुरक्षा के मामले में इसका रिकॉर्ड मजबूत है।
इसी कार्यक्रम में विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि एक मजबूत और भरोसेमंद सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के लिए वैश्विक साझेदारी ज़रूरी है। उन्होंने आत्मनिर्भरता के लिए घरेलू क्षमताओं और वैश्विक विशेषज्ञता के बीच संतुलन पर जोर दिया।
प्रमुख देशों के साथ सहयोग
इस आयोजन में कई देशों के साथ अलग-अलग बैठकें हुईं, जिनमें सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा की गई:
- भारत-सिंगापुर: 142 प्रतिभागियों वाली इस बैठक में सिंगापुर की मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग विशेषज्ञता को भारत की इंजीनियरिंग प्रतिभा और बड़े बाजार से जोड़ने पर बात हुई।
- भारत-यूरोप: 139 प्रतिभागियों ने निवेश, सप्लाई चेन, उपकरण, डिजाइन, R&D और प्रतिभा विकास जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
- भारत-दक्षिण कोरिया: 115 प्रतिभागियों के बीच हुई इस चर्चा में मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक और एडवांस पैकेजिंग समेत पूरी सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में सहयोग बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
इनपुट: IANS



