शेयर बाज़ार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 800 अंक से ज़्यादा टूटा, आईटी शेयरों में सबसे बड़ी बिकवाली
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाज़ार पर लगातार तीसरे दिन देखने को मिला। सोमवार, 9 सितंबर को बाज़ार में भारी बिकवाली हुई, जिसके…
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर भारतीय शेयर बाज़ार पर लगातार तीसरे दिन देखने को मिला। सोमवार, 9 सितंबर को बाज़ार में भारी बिकवाली हुई, जिसके चलते सेंसेक्स और निफ्टी, दोनों प्रमुख सूचकांक 1% से ज़्यादा की गिरावट के साथ बंद हुए। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस गिरावट की मुख्य वजह ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंचना और भू-राजनीतिक अनिश्चितता रही।
सोमवार को कारोबार खत्म होने पर बीएसई का 30-शेयरों वाला सेंसेक्स 813.35 अंक (1.08%) लुढ़ककर 74,764.23 पर आ गया। यह दिन का सबसे निचला स्तर भी था। इसी तरह, एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स 203.60 अंक (0.86%) की गिरावट के साथ 23,431.50 पर बंद हुआ।
किस सेक्टर में कितनी गिरावट?
इस बिकवाली का सबसे ज़्यादा असर आईटी सेक्टर पर पड़ा। निफ्टी आईटी इंडेक्स में 3.24% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इन्फोसिस, एचसीएल टेक और टेक महिंद्रा सबसे ज़्यादा नुकसान उठाने वाले शेयरों में शामिल रहे। इसके अलावा निफ्टी रियल्टी (2.23%) और फाइनेंशियल सर्विसेज (1.23%) में भी कमज़ोरी देखी गई। एफएमसीजी, प्राइवेट बैंक, मीडिया और फार्मा सेक्टर भी लाल निशान में बंद हुए।
हालांकि, बाज़ार के इस नकारात्मक रुख के बीच मेटल सेक्टर में तेज़ी बनी रही। निफ्टी मेटल इंडेक्स 1.79% की बढ़त के साथ बंद हुआ। अदाणी एंटरप्राइजेज, अदाणी पोर्ट्स, कोल इंडिया, टाटा स्टील और हिंडाल्को जैसे शेयर 1 से 5 प्रतिशत तक की बढ़त के साथ टॉप गेनर्स में शामिल रहे।
बाज़ार में गिरावट की वजह और आगे का नज़रिया
एक बाज़ार विशेषज्ञ ने बताया कि निवेशक अब मध्य पूर्व में लंबे समय तक संघर्ष की आशंका को देखते हुए सतर्क हो गए हैं। उनके मुताबिक, लगातार तनाव और जवाबी कार्रवाइयों से कच्चे तेल की कीमतें निकट भविष्य में ऊँची बनी रह सकती हैं।
विशेषज्ञ ने यह भी कहा कि इस भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण दुनिया के प्रमुख केंद्रीय बैंकों के लिए विकास और महंगाई के बीच संतुलन साधना मुश्किल हो रहा है। ऊर्जा की बढ़ती लागत आर्थिक गतिविधियों और कीमतों की स्थिरता, दोनों के लिए एक बड़ा जोखिम पैदा कर रही है, जिससे निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है।
इनपुट: IANS



