शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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मुंबई में प्रदर्शन के दौरान बच्चों के इस्तेमाल का आरोप, NHRC ने लिया संज्ञान और जारी किए नोटिस

मुंबई में 2 अक्टूबर को हुए एक कथित अवैध प्रदर्शन के दौरान नाबालिग बच्चों के इस्तेमाल और उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार…

मुंबई में प्रदर्शन के दौरान बच्चों के इस्तेमाल का आरोप, NHRC ने लिया संज्ञान और जारी किए नोटिस
(फोटो: IANS)

मुंबई में 2 अक्टूबर को हुए एक कथित अवैध प्रदर्शन के दौरान नाबालिग बच्चों के इस्तेमाल और उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं और कई संबंधित विभागों को नोटिस जारी किया है।

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यह कार्रवाई एक शिकायत के बाद की गई, जिसमें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों और वीडियो का हवाला दिया गया था। इन वीडियो में एक बच्चे को भीड़ के ऊपर उठाए हुए और कथित तौर पर आपत्तिजनक नारे लगाते हुए दिखाया गया था। शिकायत में इस बात की भी आशंका जताई गई है कि कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए बच्चों को ढाल की तरह इस्तेमाल किया गया हो सकता है।

जांच के मुख्य बिंदु और निर्देश

एनएचआरसी सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए मुंबई पुलिस आयुक्त, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, एक्स कॉर्प (X Corp) के शिकायत अधिकारी और महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रधान सचिव को नोटिस जारी किया है। आयोग ने मुंबई पुलिस को सभी डिजिटल सबूतों की जांच कर संज्ञेय अपराध पाए जाने पर FIR दर्ज करने का निर्देश दिया है। पुलिस को यह भी पता लगाने के लिए कहा गया है कि बच्चे किन हालातों में प्रदर्शन में शामिल हुए और इसमें आयोजकों की क्या भूमिका थी।

डिजिटल सबूतों और सोशल मीडिया की भूमिका

आयोग ने विशेष रूप से उन ग्रुप चैट और डिजिटल संचार की फोरेंसिक जांच के निर्देश दिए हैं, जिनमें कथित तौर पर बच्चों की भागीदारी की योजना बनाई गई थी। इसका मकसद यह जानना है कि क्या पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए बच्चों का इस्तेमाल एक सोची-समझी रणनीति थी। एनएचआरसी ने एक्स कॉर्प और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को बच्चों से जुड़े डिजिटल सबूतों को सुरक्षित रखने और कंटेंट मॉडरेशन नियमों के अनुपालन की जांच करने को कहा है।

बच्चों के संरक्षण और गोपनीयता पर जोर

एनएचआरसी ने महाराष्ट्र के महिला एवं बाल विकास विभाग को निर्देश दिया है कि किशोर न्याय अधिनियम के तहत बच्चों का बचाव और संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। आयोग ने कहा है कि यदि आवश्यक हो तो बच्चों को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश कर उनकी काउंसलिंग और पुनर्वास की व्यवस्था की जाए। पूरी प्रक्रिया के दौरान बच्चों की पहचान, निजता और गरिमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया है। सभी संबंधित अधिकारियों से एक सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) सौंपने को कहा गया है।

इनपुट: IANS

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