मतदाता सूची शुद्धीकरण पर गरमाई राजनीति, विपक्ष ने चुनाव आयोग को घेरा, CEC के इस्तीफे की मांग
चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए कराए जा रहे एसआईआर (SIR) को लेकर देश में राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को देश के लिए गलत बताते हुए इस पर…
चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के शुद्धीकरण के लिए कराए जा रहे एसआईआर (SIR) को लेकर देश में राजनीतिक विवाद गहरा गया है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया को देश के लिए गलत बताते हुए इस पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस मुद्दे पर विपक्ष एकजुट हो गया है और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी जोर पकड़ रही है।
विपक्षी नेताओं का आरोप है कि एसआईआर की आड़ में गरीब, मजदूर, कम पढ़े-लिखे और खासकर अल्पसंख्यक समुदायों के मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जा रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने 'इंडिया' ब्लॉक की एक बैठक का हवाला देते हुए कहा, “सभी की यही राय थी और वे इस बात पर सहमत थे कि एसआईआर देश के लिए गलत है... अगर आप किसी एक बूथ से 500 वोट हटा देते हैं, तो क्या इसे निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव कहा जा सकता है?” उन्होंने इसे सत्ता का दुरुपयोग बताया, जिसका सीधा असर वंचितों पर पड़ रहा है।
विभिन्न दलों और संगठनों के आरोप
इस मामले पर कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। जमात-ए-इस्लामी हिंद के मलिक मोतासिम खान ने इसे वोटर लिस्ट से नाम हटाने की साजिश करार दिया। उन्होंने दावा किया, “लिस्ट से 13 करोड़ से ज्यादा लोगों के नाम हटा दिए गए हैं।” उन्होंने कर्नाटक में फॉर्म-7 के कथित दुरुपयोग और नए जेनजी वोटरों से माता-पिता की जानकारी मांगने पर भी सवाल उठाए।
वहीं, प्रोफेसर मोहम्मद सलीम इंजीनियर ने एसआईआर की निष्पक्षता और मंशा पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि बिहार में इसे जल्दबाजी में लागू किया गया, जिसके परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटा दिए गए। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि दो चुनाव आयुक्तों की शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया गया, जिससे आयोग का आंतरिक मामला सार्वजनिक हो गया।
कांग्रेस ने उठाए प्रक्रिया पर सवाल
कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं। कांग्रेस सांसद कुमारी सैलजा ने एसआईआर को एक गंभीर चुनौती बताते हुए आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के सदस्यों ने इस पर 14 बार आपत्ति जताई, लेकिन उनकी चिंताओं को नजरअंदाज कर दिया गया। पंजाब में भी कांग्रेस नेता गुरजीत सिंह औजला ने कहा कि बूथ-स्तर के कार्यकर्ता यह सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय हैं कि कोई भी वोट डिलीट न हो। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि राहुल गांधी द्वारा दो साल पहले शुरू किए गए आंदोलन के दबाव में चुनाव आयोग अब अपना रवैया बदल रहा है और आयोग को देश से माफी मांगनी चाहिए।
अन्य प्रमुख प्रतिक्रियाएं
अभिनेता प्रकाश राज ने भी चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “छह महीने के अंदर इसकी क्या जरूरत थी? क्या प्रक्रिया अपनाई गई? यह चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है कि चुनाव आयोग में कोई लोकतांत्रिक प्रक्रिया नहीं अपनाई गई, और हम सवाल पूछ रहे हैं, लेकिन जवाब नहीं मिल रहा है।” समाजवादी पार्टी के नेता राजकुमार भाटी ने इस मुद्दे पर युवाओं के सड़कों पर उतरने को लोकतंत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत बताया और इसे एक स्वागत योग्य कदम कहा।
इनपुट: IANS



