शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों ने छोड़ी बैठक, पार्टी ने थमाया शो कॉज़ नोटिस; अमित शाह बोले — अब एक ही शिवसेना
शिवसेना (यूबीटी) के 9 में से 6 सांसद गुरुवार को दिल्ली में हुई अनिवार्य संसदीय बैठक से अनुपस्थित रहे। पार्टी ने चीफ व्हिप अनिल देसाई के जरिये सभी छह को 24 घंटे में जवाब देने का शो कॉज़ नोटिस दिया और दल-बदल विरोधी कानून की चेतावनी दी। कोल्हापुर में अमित शाह ने दावा किया कि अब केवल एकनाथ शिंदे की शिवसेना ही असली पार्टी है।
महाराष्ट्र की राजनीति में उथल-पुथल का एक नया अध्याय उस वक्त जुड़ गया जब शिवसेना (यूबीटी) के 6 सांसदों ने दिल्ली में पार्टी व्हिप द्वारा बुलाई गई संसदीय दल की अनिवार्य बैठक में शिरकत करने से परहेज किया। इसी बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कोल्हापुर में खुलकर कहा कि अब शिवसेना का कोई गुट नहीं रहा — एकनाथ शिंदे की पार्टी ही एकमात्र असली शिवसेना है।
कौन आए, कौन नहीं आए
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के कुल 9 सांसद हैं। गुरुवार को दिल्ली में हुई पार्टी की संसदीय दल की बैठक में इनमें से केवल तीन — अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजाभाऊ वाजे — उपस्थित रहे। बाकी छह सांसद बैठक से पूरी तरह अनुपस्थित रहे।
अनुपस्थित रहने वाले सांसदों के नाम इस प्रकार हैं:
नागेश आष्टीकर
संजय देशमुख
संजय जाधव
संजय दीना पाटिल
ओमप्रकाश राजेनिंबालकर
भाऊसाहेब वाकचौरे
इन सांसदों ने न केवल बैठक का बहिष्कार किया, बल्कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में अपने लिए अलग गुट की आधिकारिक मान्यता की मांग भी कर डाली। इस कदम को पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुली बगावत के तौर पर देखा जा रहा है।
पार्टी ने थमाया 24 घंटे का नोटिस
शिवसेना (यूबीटी) ने इस विद्रोह को हल्के में नहीं लिया। पार्टी के चीफ व्हिप अनिल देसाई के माध्यम से सभी छह अनुपस्थित सांसदों को 'कारण बताओ' यानी शो कॉज़ नोटिस जारी किया गया। नोटिस में सांसदों को 24 घंटे के भीतर लिखित स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है।
नोटिस में यह भी स्पष्ट किया गया कि यदि तय समयसीमा में कोई जवाब नहीं आया, तो पार्टी यह मान लेगी कि संबंधित सांसदों ने स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ दी है। इसके साथ ही भारतीय संविधान की 10वीं अनुसूची — जिसे दल-बदल विरोधी कानून के रूप में जाना जाता है — के तहत कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
इस पूरे घटनाक्रम पर आरोपी सांसदों में से ओमप्रकाश राजेनिंबालकर ने रिपोर्ट्स के अनुसार कहा कि 'भावनात्मक नजरिए से यह फैसला गलत है।' हालांकि, किसी भी बागी सांसद ने अब तक सार्वजनिक रूप से अपनी अनुपस्थिति का ठोस कारण नहीं बताया है।



