वंदे मातरम को अनिवार्य बनाने की कोशिश धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने उस संशोधन विधेयक पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है, जिसके तहत 'वंदे मातरम' का कथित अपमान एक दंडनीय अपराध बन जाएगा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के…
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने उस संशोधन विधेयक पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की है, जिसके तहत 'वंदे मातरम' का कथित अपमान एक दंडनीय अपराध बन जाएगा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, बोर्ड ने इस कदम को देश की संवैधानिक, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक भावना के विरुद्ध बताया है।
बोर्ड का मानना है कि कानून के जरिए किसी विशेष धार्मिक अवधारणा को सभी नागरिकों पर थोपना भारतीय संविधान की मूल भावना के खिलाफ है। बोर्ड के प्रवक्ता एसक्यूआर इलियास ने कहा कि कानूनी दबाव के माध्यम से 'वंदे मातरम' को सभी वर्गों और धार्मिक समुदायों के लिए अनिवार्य बनाने का कोई भी प्रयास आपत्तिजनक है।
संवैधानिक अधिकारों का हवाला
प्रवक्ता एसक्यूआर इलियास ने नागरिकों की धार्मिक स्वतंत्रता पर इसे एक 'गंभीर हमला' करार दिया। उन्होंने संवैधानिक अधिकारों का जिक्र करते हुए कहा कि संविधान का अनुच्छेद 25 हर नागरिक को अपने धर्म का पालन करने की स्वतंत्रता देता है, जबकि अनुच्छेद 19 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की गारंटी प्रदान करता है।
इलियास के अनुसार, इन संवैधानिक सुरक्षा उपायों का सीधा मतलब है कि किसी भी व्यक्ति को उसकी धार्मिक मान्यताओं के खिलाफ कोई गीत, नारा या विचारधारा अपनाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा, "मातृभूमि के प्रति प्रेम और मातृभूमि की पूजा दो बिल्कुल अलग-अलग अवधारणाएं हैं।"
देशप्रेम और आस्था पर बोर्ड का पक्ष
एक बयान में उन्होंने स्पष्ट किया कि मुसलमान अपने देश से बहुत प्यार करते हैं और इसे अपनी नागरिक व नैतिक जिम्मेदारी मानते हैं, लेकिन वे देश को देवता या देवी के रूप में नहीं पूज सकते। बोर्ड ने केंद्र सरकार से अपील की है कि वह ऐसे संवेदनशील और विभाजनकारी कदमों से बचे।
बोर्ड ने सरकार को सलाह दी कि उसे बेरोजगारी, महंगाई, गरीबी, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, आर्थिक असमानता और सामाजिक अन्याय जैसी देश की वास्तविक समस्याओं को हल करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इलियास ने कहा कि एक मजबूत और एकजुट भारत तभी बन सकता है जब हर नागरिक को समान सम्मान, न्याय और आजादी मिले और किसी की देशभक्ति को उसकी धार्मिक मान्यताओं से न आंका जाए।
इनपुट: IANS



