मंगलवार, 8 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट, तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव का असर

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और इसके चलते तेल की कीमतों में आई उछाल का असर भारतीय शेयर बाजार पर लगातार दूसरे दिन भी देखने को मिला। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को…

शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन गिरावट, तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक तनाव का असर
(फोटो: IANS)

पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और इसके चलते तेल की कीमतों में आई उछाल का असर भारतीय शेयर बाजार पर लगातार दूसरे दिन भी देखने को मिला। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, मंगलवार को बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में बंद हुए। इस गिरावट के पीछे वैश्विक अनिश्चितताओं को मुख्य कारण माना जा रहा है।

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मंगलवार को कारोबार बंद होने पर बीएसई सेंसेक्स 555.23 अंक (0.73%) गिरकर 75,577 पर आ गया, जबकि एनएसई निफ्टी 50 में 144.05 अंकों (0.61%) की गिरावट दर्ज की गई और यह 23,635.10 पर बंद हुआ। यह लगातार दूसरा कारोबारी दिन था जब बाजार में बिकवाली का दबाव हावी रहा।

छोटे-मझोले शेयरों में तेजी, बड़े सूचकांक कमजोर

हालांकि, एक दिलचस्प पहलू यह रहा कि जहां मुख्य बेंचमार्क सूचकांकों में कमजोरी थी, वहीं व्यापक बाजार यानी छोटे और मझोले शेयरों में थोड़ी बढ़त देखी गई। निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 0.18% और निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.12% की मामूली तेजी के साथ बंद हुए।

सेक्टर-वार प्रदर्शन देखें तो ऑयल एंड गैस और प्राइवेट बैंक इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट रही। निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.98% और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज 0.93% टूटे। इनके अलावा सीमेंट और आईटी सेक्टर पर भी दबाव दिखा। इसके विपरीत, निफ्टी मीडिया (1.31%), फार्मा (0.77%) और हेल्थकेयर (0.63%) जैसे सेक्टरों ने बेहतर प्रदर्शन किया। एफएमसीजी और ऑटो शेयरों में भी तेजी का रुख रहा, जबकि निफ्टी मेटल इंडेक्स में कोई बदलाव नहीं हुआ।

विशेषज्ञों की राय: आगे क्या?

एक बाजार विशेषज्ञ ने बताया कि अप्रैल में मिड-कैप और मार्च में स्मॉल-कैप शेयरों ने अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर को छूने के बाद से 20-30% का शानदार रिटर्न दिया है। यह तेजी घरेलू निवेश में सुधार और वैल्यू बाइंग (कम कीमत पर अच्छे शेयर खरीदना) की वजह से आई।

हालांकि, विशेषज्ञ ने चेताया कि कच्चे तेल की कीमतों का 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचना कॉर्पोरेट आय की उम्मीदों पर पानी फेर सकता है। उन्होंने कहा कि बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका है, इसलिए कम अवधि के निवेशकों के लिए थोड़ा मुनाफा वसूलना एक समझदारी भरा कदम हो सकता है। उनके अनुसार, पिछले 5-6 महीनों में मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों के शानदार प्रदर्शन को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है। रणनीतिक तौर पर अब लार्ज-कैप शेयरों और नॉन-इक्विटी ईटीएफ पर ध्यान केंद्रित करना अधिक सुरक्षित हो सकता है।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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