शुक्रवार, 11 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल का असर: भारी उतार-चढ़ाव के बाद मामूली गिरावट पर बंद हुए भारतीय शेयर बाजार

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। दिन के कारोबार में लगभग 1% तक फिसलने के बाद, बाजार निचले स्तरों से…

वैश्विक तनाव और महंगे कच्चे तेल का असर: भारी उतार-चढ़ाव के बाद मामूली गिरावट पर बंद हुए भारतीय शेयर बाजार
(फोटो: IANS)

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के कारण शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। दिन के कारोबार में लगभग 1% तक फिसलने के बाद, बाजार निचले स्तरों से उबरकर मामूली गिरावट के साथ बंद हुए। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 120.83 अंक (0.16%) गिरकर 74,781.76 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 सूचकांक 79.70 अंक (0.34%) की गिरावट के साथ 23,398.10 पर रहा।

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बाजार की शुरुआत बेहद कमजोर रही थी। सेंसेक्स अपने पिछले बंद से लगभग 593 अंक नीचे 74,309.16 पर खुला और एक समय 74,160.16 के दिन के न्यूनतम स्तर तक लुढ़क गया था। हालांकि, बाद में आईटी, एफएमसीजी और बैंक शेयरों से मिले समर्थन के चलते इसमें शानदार रिकवरी हुई और यह अपने दिन के निचले स्तर से 621.59 अंक सुधरकर बंद हुआ। इसी तरह, निफ्टी भी 23,231.40 के इंट्रा-डे लो तक गया था।

सेक्टोरल प्रदर्शन और बाजार की चाल

व्यापक बाजारों में भी बिकवाली का दबाव दिखा, जहाँ निफ्टी मिडकैप में 0.26% और निफ्टी स्मॉलकैप में 0.58% की गिरावट दर्ज की गई। सेक्टरों की बात करें तो निफ्टी रियल्टी (2.7%) और निफ्टी मेटल (2.3%) सबसे ज्यादा टूटे। इनके अलावा ऑटो, ऑयल एंड गैस, और पीएसयू बैंक जैसे सेक्टर्स भी लाल निशान में रहे। इसके विपरीत, निफ्टी प्राइवेट बैंक, मीडिया और आईटी सूचकांकों में बढ़त देखने को मिली।

निफ्टी 50 के शेयरों में एचडीएफसी बैंक, डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज और टेक महिंद्रा शीर्ष पर रहे, जबकि हिंडाल्को इंडस्ट्रीज, जेएसडब्ल्यू स्टील और आयशर मोटर्स में सबसे ज्यादा गिरावट आई।

बाजार पर दबाव के मुख्य कारण

एक बाजार विशेषज्ञ के मुताबिक, पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से कच्चे तेल (ब्रेंट क्रूड) की कीमत 110 डॉलर प्रति बैरल की ओर बढ़ रही है, जिससे सप्लाई बाधित होने की चिंता है। तेल की बढ़ती कीमतों ने वैश्विक बॉन्ड यील्ड को बढ़ा दिया है, जहाँ अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5% के करीब पहुंच गई है। इससे इक्विटी वैल्यूएशन पर दबाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा सख्त रुख अपनाए जाने की आशंका बढ़ रही है। साथ ही, रुपया गिरकर 95.6 प्रति डॉलर पर आ गया और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को कमजोर किया।

पूरे हफ्ते की बात करें तो निफ्टी 50 में 2.1% की गिरावट आई है। वहीं, रियल्टी सेक्टर दो महीने से ज्यादा के निचले स्तर पर पहुंच गया। इस बीच, बैंक यूनियनों की हड़ताल ने भी बैंकिंग कामकाज को प्रभावित किया।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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