बच्चों में सर्दी-जुकाम जैसे लक्षण? WHO ने RSV वायरस के गंभीर खतरे को लेकर चेताया
साधारण सर्दी-जुकाम जैसे लक्षणों से शुरू होने वाला रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (RSV) दुनिया भर में छोटे बच्चों के लिए एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बन गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस वायरस को लेकर…
साधारण सर्दी-जुकाम जैसे लक्षणों से शुरू होने वाला रेस्पिरेटरी सिंसिटियल वायरस (RSV) दुनिया भर में छोटे बच्चों के लिए एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बन गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस वायरस को लेकर चेतावनी जारी की है, क्योंकि यह बच्चों में गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, हर साल इस वायरस के कारण 36 लाख से ज़्यादा बच्चों को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ता है और लगभग 1 लाख छोटे बच्चों की मौत हो जाती है।
WHO ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि आरएसवी एक बेहद संक्रामक वायरस है। यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों से फैलता है। इसके अलावा, किसी संक्रमित सतह को छूने के बाद आंख, नाक या मुंह को छूने से भी संक्रमण का खतरा रहता है। इसी वजह से स्कूल, डे-केयर सेंटर और भीड़ वाली जगहों पर बच्चों को इससे बचाना एक बड़ी चुनौती होती है।
किन बच्चों को है ज़्यादा खतरा?
हालांकि आरएसवी किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन इसका सबसे गंभीर असर छोटे बच्चों पर देखा जाता है। विशेष रूप से, छह महीने से कम उम्र के शिशु, समय से पहले जन्मे बच्चे (प्रीमैच्योर) और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले बच्चों में गंभीर बीमारी का जोखिम काफी अधिक होता है।
सामान्य सर्दी से गंभीर बीमारी के संकेत कैसे पहचानें?
शुरुआत में इसके लक्षण सामान्य सर्दी-खांसी जैसे ही होते हैं, जैसे नाक बहना, छींक, खांसी या हल्का बुखार। लेकिन अगर स्थिति गंभीर हो जाए तो कुछ खास संकेतों पर ध्यान देना बेहद ज़रूरी है। इन गंभीर लक्षणों में शामिल हैं:
- सांस लेने में तकलीफ होना
- बच्चे का ठीक से दूध न पीना या खाना न खाना
- बहुत ज़्यादा सुस्त या थका हुआ दिखना
- होंठ और नाखूनों का रंग नीला पड़ना
इनमें से कोई भी संकेत दिखने पर माता-पिता को फौरन डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
बचाव के लिए क्या करें?
कुछ सामान्य सावधानियां बरतकर आरएसवी के संक्रमण से बच्चों को बचाया जा सकता है। सबसे ज़रूरी है कि बच्चे को छूने से पहले और बाद में हाथ अच्छी तरह धोएं। बीमार लोगों को शिशु से दूर रखें और घर में बार-बार छुई जाने वाली सतहों को नियमित रूप से साफ करें। बच्चे के आसपास धूम्रपान करने से बचें, क्योंकि इससे सांस संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। डब्ल्यूएचओ ने गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए डॉक्टर से आरएसवी वैक्सीन या शिशु के लिए उपलब्ध आरएसवी एंटीबॉडी जैसे विकल्पों पर सलाह लेने का भी सुझाव दिया है।
इनपुट: IANS



