69 साल पुरानी वीर गाथा को सलाम

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खुशनसीब होते है वो जो वतन पर मिट जाते है
मर कर भी वो लोग अमर शहीद हो जाते है
करते है तुम्हे सालम ऐ वतन पर मिट जाने वालों
तुम्हारी हर साँस के कर्ज़दार रहेंगे हम देश वाले.

आईए बात करते है एक ऐसी ही वीर के बारें में जिन्होंने अपने देश के लिए अपने प्राणों को भी त्याग दिया. जिन्हें आज भी सम्मान दिया जाता है और याद किया जाता है.

दक्षिण कोरिया ने कोरियाई युद्ध में अहम भूमिका निभाने के लिए भारतीय सेना के स्वर्गीय ए.जी. रंगराज को अपने देश के सबसे बड़े युद्ध सम्मान ‘वॉर हीरो’ से सम्मानित करने का ऐलान किया है. 2020 में इस युद्ध को 70 साल होने जा रहे इसी अवसर पर दक्षिण कोरिया की ओर से इस सम्मान का ऐलान किया गया है.

ऐसा कहा जाता है कि जो तूफ़ानों में पलते हैं, वही दुनिया बदलते हैं, ऐेसे ही है भारतीय सेना के स्वर्गीय ए.जी रंगराज. जिन्हें दक्षिण कोरिया के वॉर-वेटरन मंत्रालय की ओर से हर साल युद्ध की याद में सम्मान देने का ऐलान किया.

लेफ्टिनेंट कर्नल ए. जी. रंगराज की अगुवाई में 60वीं पैराशूट फील्ड एंबुलेंस ने नॉर्थ और साउथ कोरिया के बीच हुई जंग में मोबाइल आर्मी सर्जिकल हॉस्पिटल को चलाया था. भारत की ओर से ये सुविधा तीनों साल के लिए शुरू की गई थी, इसी के लिए बाद में ए. जी. रंगराज को महा वीरचक्र से भी सम्मानित किया गया था.

सियोल में मौजूद कोरियन वॉर मेमोरियल में अगले साल जुलाई 2020 में लेफ्टिनेंट कर्नल ए.जी. रंगराज की बड़ी तस्वीर लगाई जाएगी. वॉर मेमोरियल में भारत के नाम का एक अलग सेक्शन बनाया गया है. इसके साथ ही कोरिया के कई सार्वजनिक स्थल पर भी बड़े कटआउट को लगाया जाएगा.

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बता दें कि कोरियन वॉर में संयुक्त राष्ट्र की ओर से फोर्स भेजी गई थी, उस वक्त सोवियत यूनियन और चीन जैसे देशों ने नॉर्थ कोरिया का सपोर्ट किया था लेकिन भारत साउथ कोरिया के साथ खड़ा था. इस युद्ध में भारतीय सेना के स्वर्गीय ए.जी रंगराज भी शामिल थे. जिसमें कुल 627 जवान थे.