बुंदेलखंड में चीतों की वापसी: सागर के दुर्गावती टाइगर रिज़र्व में छोड़ा गया जोड़ा, CM ने रखा 'वियोम' और 'नीरा' नाम
मध्य प्रदेश में चीता पुनर्स्थापन की कोशिशें एक नए पड़ाव पर पहुँच गई हैं। कूनो नेशनल पार्क और गांधी सागर अभयारण्य के बाद अब सागर ज़िले का वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व चीतों का तीसरा ठिकाना बन गया…
मध्य प्रदेश में चीता पुनर्स्थापन की कोशिशें एक नए पड़ाव पर पहुँच गई हैं। कूनो नेशनल पार्क और गांधी सागर अभयारण्य के बाद अब सागर ज़िले का वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिज़र्व चीतों का तीसरा ठिकाना बन गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बुधवार को इस टाइगर रिज़र्व में एक चीता जोड़े को छोड़ा, जिसके साथ ही 170 साल बाद इस क्षेत्र में चीतों की वापसी हुई है।
बुंदेलखंड के वन्य जीवन के लिए 7 अक्टूबर का दिन ऐतिहासिक रहा, जब मुख्यमंत्री ने इन दो चीतों का नामकरण 'वियोम' और 'नीरा' किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश की धरती चीतों के बसने के लिए अनुकूल साबित हुई है। उन्होंने इस अभयारण्य की एक ख़ासियत का भी ज़िक्र किया। अधिकारियों ने बताया कि कूनो और गांधी सागर के विपरीत, दुर्गावती टाइगर रिज़र्व में चीतों को उस इलाके में छोड़ा गया है जहाँ पहले से बाघ भी मौजूद हैं।
वन्यजीव संरक्षण के साथ ग्रामीणों का विकास
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस कार्यक्रम में वन्यजीव संरक्षण को स्थानीय समुदाय के विकास से जोड़ने पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, "जब हम अपने वन्य प्राणियों की चिंता करते हैं, तो यह भी हमारा दायित्व है कि हम अपने ग्रामवासियों की भी चिंता करें।" उन्होंने बताया कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि अभयारण्यों में पर्यटन से होने वाली आय में स्थानीय ग्रामीणों की भी भागीदारी हो।
उन्होंने आँकड़े देते हुए कहा कि इस वर्ष अभयारण्यों से लगभग 80 करोड़ रुपये का राजस्व मिला, जिसमें से 20 करोड़ की राशि आसपास के ग्रामीणों में वितरित की गई है। मुख्यमंत्री ने इसे ग्रामीणों का हक़ बताया, क्योंकि वे पीढ़ियों से इन जंगलों के पास रहते आए हैं।
होम स्टे और पशुपालन को बढ़ावा
सरकार स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने के लिए होम स्टे योजना को भी बढ़ावा दे रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, टाइगर रिज़र्व के बफर ज़ोन में रहने वाले लोग अपने घरों को होम स्टे में बदल सकते हैं, जिसके लिए सरकार उन्हें 2-3 लाख रुपये का अनुदान भी देगी। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि वन्य क्षेत्रों में खेती की ज़मीन कम होती है, लेकिन पशुधन बहुत होता है। इसलिए, सरकार समितियों के माध्यम से दूध खरीदकर पशुपालन को प्रोत्साहित करेगी, जिसका एक बड़ा लक्ष्य गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में तय किया गया है।
इनपुट: IANS



