RBI की नई NBFC सूची: तीन सरकारी कंपनियां पहली बार 'अपर लेयर' में शामिल, कुल संख्या 17 हुई
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की सबसे बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के लिए अपनी नई सूची जारी कर दी है, जिसमें इस बार तीन सरकारी कंपनियों को पहली बार शामिल किया गया है। समाचार एजेंसी…
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की सबसे बड़ी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs) के लिए अपनी नई सूची जारी कर दी है, जिसमें इस बार तीन सरकारी कंपनियों को पहली बार शामिल किया गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जारी इस 'अपर लेयर' सूची में अब कुल 17 कंपनियां हैं, जबकि पहले यह संख्या 15 थी।
इस सूची में शामिल होने वाली कंपनियों पर RBI के नियम काफी सख्त होते हैं, ताकि वित्तीय स्थिरता बनी रहे। इस बार आरईसी लिमिटेड, पावर फाइनेंस कॉरपोरेशन (PFC) और इंडियन रेलवे फाइनेंस कॉरपोरेशन (IRFC) को पहली बार इस श्रेणी में जगह मिली है।
क्या है यह 'अपर लेयर' और क्यों है यह महत्वपूर्ण?
RBI कुछ सबसे बड़ी और महत्वपूर्ण NBFCs को 'अपर लेयर' में रखता है ताकि उन पर खास नजर रखी जा सके। नए मानकों के अनुसार, जिन कंपनियों की प्रबंधनाधीन संपत्ति (Assets Under Management) कम से कम एक लाख करोड़ रुपए है, उन्हें इसमें शामिल किया जाता है। इन कंपनियों को जोखिम प्रबंधन और अनुपालन से जुड़े कड़े नियमों का पालन करना पड़ता है। केंद्रीय बैंक का मानना है कि इन बड़ी वित्तीय संस्थाओं पर मजबूत निगरानी रखना देश की वित्तीय प्रणाली की स्थिरता के लिए जरूरी है।
सूची में हुए अहम बदलाव
इस बार की सूची कई मायनों में खास है। RBI ने बताया कि वर्ष 2025-26 के लिए मानकों की समीक्षा के कारण कोई अलग सूची जारी नहीं की गई थी, और अब वित्त वर्ष 2026-27 की यह सूची संशोधित मानदंडों पर आधारित है।
नए नाम: REC, PFC, और IRFC के जुड़ने से सूची में कंपनियों की संख्या बढ़ी है।
बाहर हुईं कंपनियां: पीएनबी हाउसिंग फाइनेंस और सम्मान कैपिटल इस बार निर्धारित मानदंडों को पूरा नहीं कर सकीं, इसलिए उनके नाम नई सूची में नहीं हैं। हालांकि, RBI के नियमों के अनुसार, एक बार 'अपर लेयर' में वर्गीकृत होने के बाद कंपनी पर कम से कम 5 साल तक सख्त नियम लागू रहते हैं, भले ही वह बाद में मानदंड पूरे न करे।
टाटा संस पर स्थिति पहले जैसी
RBI ने स्पष्ट किया है कि टाटा संस को एक बार फिर इस सूची में शामिल किया गया है। हालांकि, यह फैसला कंपनी द्वारा दायर पंजीकरण रद्द करने के आवेदन से अलग है, जो अभी केंद्रीय बैंक के विचाराधीन है। जनवरी 2025 में जारी सूची में भी यही स्थिति बताई गई थी। सूची में बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस, और एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस जैसी अन्य प्रमुख कंपनियां भी शामिल हैं।
इनपुट: IANS



