रविवार, 21 जून 2026 · नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश

राम मंदिर दान हेराफेरी मामला: SIT जांच में बड़ा मोड़, ट्रस्ट पदाधिकारियों के अयोध्या छोड़ने पर रोक

अयोध्या राम मंदिर में दान और जमीन खरीद में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही SIT ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों के शहर छोड़ने पर रोक लगा दी है। जांच दल ने 140 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें बाजार भाव से 500-800% अधिक कीमत पर जमीन खरीदने और दान के रिकॉर्ड में गड़बड़ी के आरोप शामिल हैं।

राम मंदिर दान हेराफेरी मामला: SIT जांच में बड़ा मोड़, ट्रस्ट पदाधिकारियों के अयोध्या छोड़ने पर रोक
AI जनित प्रतीकात्मक चित्र

मुख्य विकास: SIT ने कसी नकेल

अयोध्या, उत्तर प्रदेश अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और संचालन से जुड़े मामलों में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच ने एक बड़ा मोड़ ले लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले की पड़ताल कर रही विशेष जांच दल (SIT) ने राम मंदिर ट्रस्ट के सभी पदाधिकारियों और संबंधित लोगों के अयोध्या छोड़कर जाने पर रोक लगा दी है। यह पाबंदी जांच पूरी होने तक लागू रहेगी। इस फैसले से पूरे प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई है।

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मिली जानकारी के मुताबिक, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 13 जून 2026 को गठित की गई SIT ने अपनी जांच का दायरा काफी बढ़ा दिया है। लगभग 20 सदस्यों वाली यह टीम पिछले सात दिनों से मंदिर परिसर में डेरा डाले हुए है और अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट तैयार कर चुकी है। बताया जा रहा है कि यह करीब 140 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट है, जिसे जल्द ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कार्यालय में सौंपा जा सकता है।

जांच के दायरे में दान से लेकर जमीन तक

सूत्रों के हवाले से खबर है कि SIT की जांच सिर्फ श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान में कथित हेराफेरी तक ही सीमित नहीं है। जांच का एक बड़ा हिस्सा ट्रस्ट द्वारा की गई जमीन की खरीद-फरोख्त पर केंद्रित है। आरोप है कि ट्रस्ट ने मंदिर परिसर के विस्तार के लिए लगभग 71 एकड़ जमीन बाजार भाव से 500 से 800 प्रतिशत तक अधिक कीमत पर खरीदी थी। इस मामले ने पहले भी सियासी पारा चढ़ाया था, जब समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी जैसे विपक्षी दलों ने इसे जोर-शोर से उठाया था।

इसके अलावा, जांच टीम इन बिंदुओं पर भी पड़ताल कर रही है:

  • सोने, चांदी के आभूषणों, हीरे और अन्य कीमती पत्थरों के रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियां।
  • कुंभ मेले के दौरान उमड़ी भारी भीड़ से मिले दान का हिसाब-किताब। उस दौरान रोजाना करीब 10 लाख श्रद्धालु आते थे और दान पेटियां कुछ ही घंटों में भर जाती थीं।
  • मंदिर निर्माण के लिए खरीदी गई सामग्री की गुणवत्ता और कीमत की जांच।

इसी सिलसिले में SIT ने मंदिर के सचिव से बंद कमरे में करीब तीन घंटे तक लंबी पूछताछ भी की है। हालांकि, रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रस्ट के पदाधिकारी रिकॉर्ड और लेन-देन पर संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए हैं।

प्रशासनिक कार्रवाई और भविष्य की अटकलें

मामले की गंभीरता को देखते हुए SIT ने सख्त रुख अपनाया है। 21 जून को जांच टीम के लखनऊ रवाना होने से पहले यह निर्देश जारी किया गया कि कोई भी पदाधिकारी शहर न छोड़े। अभी ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष महंत गोविंद देव गिरि से पूछताछ होनी बाकी है। जांच के दायरे में आए आपूर्तिकर्ताओं और ठेकेदारों को भी तलब कर उनसे संबंधित दस्तावेज मांगे गए हैं।

सूत्रों का दावा है कि SIT की अंतिम रिपोर्ट के आधार पर कई लोगों पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है। यह भी कहा जा रहा है कि मंदिर से जुड़े कुछ सेवादारों की सेवाएं भी समाप्त की जा सकती हैं। इस पूरे प्रकरण में नृपेंद्र मिश्र के बयानों को काफी अहम माना जा रहा है, जिसे सख्त कार्रवाई के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। कुछ गलियारों में यह भी चर्चा है कि प्रशासनिक ढांचे में बदलाव कर उन्हें मंदिर प्रबंधन में कोई बड़ी भूमिका (संभावित CEO पद) दी जा सकती है। फिलहाल, जांच की दैनिक रिपोर्ट डिजिटल रूप में सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जा रही है, जिससे स्पष्ट है कि शीर्ष स्तर से इस मामले पर पैनी नजर रखी जा रही है।

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News4Social यूपी डेस्क

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