बुधवार, 24 जून 2026 · नई दिल्ली
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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: SIT ने सौंपी रिपोर्ट, पर FIR न होने से उठे गंभीर सवाल, अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं पर SIT ने अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप दी है। रिपोर्ट में वित्तीय गड़बड़ियों का जिक्र है, लेकिन FIR दर्ज नहीं हुई है। एक दानदाता ने 200 किलो चांदी दान देने पर रसीद न मिलने का दावा किया है। समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बिना FIR की जांच को 'बिना तीर की कमान' बताकर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद: SIT ने सौंपी रिपोर्ट, पर FIR न होने से उठे गंभीर सवाल, अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा
स्रोत: अखिलेश यादव

राम मंदिर चढ़ावा विवाद और SIT की जांच

अयोध्या, उत्तर प्रदेश अयोध्या में राम मंदिर को मिलने वाले दान और चढ़ावे में कथित वित्तीय अनियमितताओं और चोरी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस संवेदनशील प्रकरण की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश सरकार को सौंप दी है, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 13 जून 2026 को योगी सरकार द्वारा गठित इस SIT ने कई दिनों की गहन पड़ताल के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार की है।

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इस उच्च-स्तरीय जांच दल में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, आईजी रेंज किरन एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल थे। बताया जा रहा है कि SIT की रिपोर्ट में मंदिर के चढ़ावे के प्रबंधन में गंभीर वित्तीय गड़बड़ियों और प्रशासनिक स्तर पर हुई खामियों का विस्तार से उल्लेख किया गया है। हालांकि, इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि रिपोर्ट सौंपे जाने के बावजूद अब तक कोई भी प्राथमिकी (FIR) दर्ज नहीं की गई है, जिसने पूरी जांच प्रक्रिया पर एक बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

दानदाता का दावा और 200 किलो चांदी का रहस्य

इस विवाद के केंद्र में कैसल ग्रुप ऑफ कंपनीज के प्रबंध निदेशक, डॉ. राजू वी. मनवानी का एक सनसनीखेज दावा है। डॉ. मनवानी के अनुसार, उन्होंने राम मंदिर के लिए 200 किलोग्राम चांदी दान की थी। यह चांदी एक-एक किलोग्राम वजन की 200 ईंटों के रूप में थी। उनका आरोप है कि उन्होंने यह दान सीधे राम मंदिर से जुड़े पदाधिकारी चंपत राय को सौंपा था, लेकिन इस भारी-भरकम दान के बदले में उन्हें किसी भी प्रकार की कोई आधिकारिक रसीद नहीं दी गई।

एक साक्षात्कार में उन्होंने अपनी चिंता जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें अब यह डर सता रहा है कि उनके द्वारा श्रद्धा से दिया गया दान कहीं गलत जगह तो नहीं चला गया। रसीद न मिलने से इस दान की प्रामाणिकता और उपयोग को लेकर गंभीर संदेह पैदा हो गए हैं। इसी बीच, मीडिया में ऐसी खबरें भी सामने आ रही हैं कि दान में दी गई 'चांदी के कागभुसुंडि' की एक मूर्ति भी गायब है, जिससे यह मामला और भी पेचीदा हो गया है।

अखिलेश यादव ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

मामले में FIR दर्ज न होने को लेकर उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने जांच प्रक्रिया की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि बिना FIR के SIT का गठन महज एक दिखावा है।

अपने एक बयान में उन्होंने सरकार की कार्रवाई पर तंज कसते हुए कहा, "FIR के बिना SIT बिना तीर की कमान है।" अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि यह SIT 'जांच' से ज्यादा मामले को 'ढांक' (दबाने) या 'बांट' (आपस में बांट लेने) के लिए बनाई गई है। उनके इस बयान ने मामले को पूरी तरह से राजनीतिक रंग दे दिया है और विपक्ष को सरकार को घेरने का एक बड़ा मुद्दा मिल गया है। विपक्ष का तर्क है कि अगर SIT को वाकई अनियमितताएं मिली हैं, तो कानूनी कार्रवाई शुरू करने के लिए FIR दर्ज करने में देरी क्यों की जा रही है।

आगे क्या? सरकार के अगले कदम का इंतजार

अब गेंद पूरी तरह से राज्य सरकार के पाले में है। SIT की रिपोर्ट में उल्लिखित तथ्यों और निष्कर्षों के आधार पर सरकार क्या कदम उठाती है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की जांच रिपोर्ट के बाद FIR दर्ज करना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है ताकि दोषियों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा जा सके। रिपोर्ट के निष्कर्षों को सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन जब तक इस मामले में कोई ठोस कानूनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक राम मंदिर जैसे पवित्र स्थल के प्रबंधन और पारदर्शिता पर सवाल उठते रहेंगे। पूरे प्रदेश की निगाहें अब योगी सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं।

NN

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