राम जन्मभूमि ट्रस्ट की बैठक पर अयोध्या के संत समाज ने उठाए सवाल, पारदर्शिता की मांग
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बैठक से पहले, स्थानीय संत समाज ने ट्रस्ट के कामकाज में पारदर्शिता की कमी और कथित अनियमितता
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक को लेकर सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बैठक से पहले, स्थानीय संत समाज ने ट्रस्ट के कामकाज में पारदर्शिता की कमी और कथित अनियमितताओं को लेकर गहरी चिंता जाहिर की है। संतों का मानना है कि आस्था से जुड़े इस मामले में कोई भी फैसला अयोध्या और संत समाज को विश्वास में लिए बिना नहीं किया जाना चाहिए।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के आरोप लग चुके हैं, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है। आचार्य वरुण दास महाराज ने कहा, "ऐसे समय में जब आरोप-प्रत्यारोप का माहौल बना हुआ है, तब यह बैठक पूरे देश और दुनिया के श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखती है।" उन्होंने यह भी बताया कि इस बैठक पर सिर्फ अयोध्या ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व की नजरें टिकी हुई हैं।
संतों ने जताई कई आशंकाएं
आचार्य वरुण दास ने इस बात पर भी चिंता व्यक्त की कि उन्हें जानकारी मिली है कि ट्रस्ट के कई सदस्य बैठक में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि राम जन्मभूमि आंदोलन संतों और स्थानीय लोगों के सहयोग से सफल हुआ था, इसलिए परियोजना से जुड़े हर फैसले में उनकी राय शामिल होनी चाहिए। उन्होंने ट्रस्ट को केवल आंतरिक बैठकों तक सीमित न रहकर, संत समाज से भी पारदर्शी संवाद करने की सलाह दी।
वहीं, साकेत भवन के महंत सीताराम दास ने बैठक की तारीख बदलने पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा, "श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक, जो पहले 11 तारीख को होनी थी, उसे कथित तौर पर गोविंद देव गिरी के दबाव में 6 तारीख को कर दिया गया है। आशंका है कि यह बैठक गड़बड़ी करने के इरादे से बुलाई गई है।" उन्होंने यह भी पूछा कि ट्रस्ट के अध्यक्ष की अनुपस्थिति में ऐसी बैठक कैसे हो सकती है, और कहा कि संत समाज इसे स्वीकार नहीं करेगा।
सीईओ पद और 'सरकारीकरण' का विरोध
संत समाज ने ट्रस्ट में किसी बाहरी व्यक्ति को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) बनाने या प्रशासनिक ढांचे में बड़े बदलाव की किसी भी कोशिश का विरोध करने की चेतावनी दी है। आचार्य वरुण दास महाराज ने कहा कि सीईओ व्यवस्था से परियोजना के 'सरकारीकरण' की आशंका पैदा होती है। उन्होंने स्पष्ट किया, "यदि ऐसे निर्णय लिए जाते हैं तो संत समाज और स्थानीय लोग इसका विरोध करेंगे और आंदोलन होगा।"
दूसरी ओर, बैठक से पहले मीडिया से बात करते हुए ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी ने कहा, "मैं बैठक के बाद आपसे बात करूंगा। मैं अगले तीन दिनों तक यहीं रहूंगा और आप सभी से मिलकर हर चीज पर विस्तार से चर्चा करूंगा।"
इनपुट: IANS



