सेमीकंडक्टर और चिप: रक्षा तकनीक में आत्मनिर्भरता की ओर DRDO के बड़े कदम
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) भारत को सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन और अगली पीढ़ी की वायरलेस संचार तकनीकों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है। नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष…
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) भारत को सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन और अगली पीढ़ी की वायरलेस संचार तकनीकों में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम भूमिका निभा रहा है। नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष सत्र के दौरान, डीआरडीओ ने अपनी उन उन्नत क्षमताओं का प्रदर्शन किया जो देश की रक्षा प्रणालियों को सशक्त बनाती हैं। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इस कार्यक्रम में मिसाइल, रडार, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणाली और आधुनिक संचार उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली कई स्वदेशी तकनीकों को पेश किया गया।
27 अक्टूबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा उद्घाटन किए गए इस सम्मेलन में उद्योग, शिक्षा जगत और रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स के विशेषज्ञ शामिल हुए। रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इसमें 12 मंत्रालयों और विभागों की भागीदारी रही। 29 अक्टूबर तक चले इस आयोजन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित चिप, नई माइक्रोप्रोसेसर तकनीक और स्वदेशी चिप विकास जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा हुई।
रक्षा की 'आंख' और 'दिमाग' बनीं स्वदेशी चिप
प्रदर्शनी के केंद्र में दो प्रमुख सेमीकंडक्टर प्रौद्योगिकियां थीं, जिन्हें दिल्ली स्थित सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी ने विकसित किया है। इनमें से एक है मोनोलिथिक माइक्रोवेव इंटीग्रेटेड सर्किट (MMIC), जो गैलियम आर्सेनाइड और गैलियम नाइट्राइड जैसे उन्नत पदार्थों से बनी है। यह तकनीक आधुनिक रडार और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों का एक अनिवार्य हिस्सा है।
दूसरी महत्वपूर्ण तकनीक इन्फ्रारेड फोकल प्लेन एरे (IRFPA) है, जिसे अक्सर मिसाइलों की 'आंख' भी कहा जाता है। यह तकनीक लक्ष्य से निकलने वाली गर्मी (थर्मल सिग्नेचर) को पहचानकर उसकी एक तस्वीर बनाती है। इससे मिसाइल को उड़ान के अंतिम चरण में अपने लक्ष्य को सटीक रूप से पहचानने और उसका पीछा करने में मदद मिलती है। इसके शॉर्ट वेव, मिड वेव और लॉन्ग वेव संस्करण भी प्रदर्शित किए गए।
संचार और सैनिक सुरक्षा में नई तकनीकें
डीआरडीओ ने सैन्य संचार को मजबूत करने के लिए 30 और 31 अक्टूबर को 'विकॉम-26' नामक अपना पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन भी आयोजित किया। इसमें भारत और अमेरिका के विशेषज्ञ हिस्सा ले रहे हैं और कुल 103 शोध पत्र प्रस्तुत किए जा रहे हैं। सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने कहा, "आधुनिक युद्ध में संचार प्रणाली केवल बातचीत तक सीमित नहीं है, बल्कि सैनिकों की स्थिति की जानकारी, सैन्य टुकड़ियों के बीच तालमेल और तेजी से फैसले लेने के लिए भी जरूरी है।"
इसके अलावा, डीआरडीओ ने सैनिकों की सुरक्षा और क्षमता बढ़ाने वाले कई अन्य उपकरण भी दिखाए। इनमें स्क्रैमजेट इंजन, उन्नत संचार प्रणाली, क्वांटम रैंडम नंबर जनरेटर, फोटोनिक इंटीग्रेटेड सर्किट, लेजर प्रॉक्सिमिटी सेंसर, अत्यधिक ठंड से बचाने वाले विशेष कपड़े, महिला सैनिकों के लिए 'प्रबला' फुल बॉडी प्रोटेक्टर और सैनिकों की शारीरिक क्षमता बढ़ाने वाले एक्सोस्केलेटन शामिल थे।
इनपुट: IANS



