AI की दौड़ में चीन ने अमेरिका को почти पकड़ा, प्रदर्शन का अंतर अब सिर्फ़ 3% बचा
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में चीन और अमेरिका के बीच प्रतिस्पर्धा बेहद तेज़ हो गई है। एक समय तकनीकी महाशक्ति माने जाने वाले अमेरिका को अब चीन से कड़ी चुनौती मिल रही है, क्योंकि दोनों देशों…
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की दुनिया में चीन और अमेरिका के बीच प्रतिस्पर्धा बेहद तेज़ हो गई है। एक समय तकनीकी महाशक्ति माने जाने वाले अमेरिका को अब चीन से कड़ी चुनौती मिल रही है, क्योंकि दोनों देशों के AI मॉडल्स के प्रदर्शन का अंतर अब तक के सबसे निचले स्तर, महज़ 3 प्रतिशत पर आ गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पाँच वर्षों में चीन ने इस क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति की है, जिससे वह भविष्य में AI का वैश्विक लीडर बनने की राह पर अग्रसर है।
चीन की यह तेज़ी अमेरिका की सिलिकॉन वैली में भी हलचल पैदा कर रही है। कई अमेरिकी कंपनियाँ इस बढ़ती प्रतिस्पर्धा से दबाव महसूस कर रही हैं। यह बदलाव खास तौर पर चीन की कंपनी डीपसीक (DeepSeek) के V4.1 फ्लैश मॉडल के सितंबर में लॉन्च होने के बाद और स्पष्ट हुआ है।
प्रदर्शन का घटता अंतर
ब्लूमबर्ग इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट के आँकड़े इस घटते फासले को साफ दर्शाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल मई में दोनों देशों के AI प्रदर्शन का अंतर 9% कम हुआ था। वहीं, 2026 की शुरुआत के अनुमान की तुलना में यह गिरावट 15% थी, जो अब घटकर केवल 3% रह गई है। यह चीन की तीव्र प्रगति का एक बड़ा संकेत है।
कम लागत, बड़ा असर
चीन की सफलता का एक बड़ा कारण कम लागत में प्रभावी AI मॉडल विकसित करना है। उदाहरण के लिए, हांगचो की जिस कंपनी ने 'डीपसीक' नामक ओपन-सोर्स AI मॉडल लॉन्च कर दुनिया को चौंकाया, उसे बनाने में सिर्फ़ 2,94,000 डॉलर की लागत आई। यह राशि अमेरिकी AI कंपनियों द्वारा किए जाने वाले भारी-भरकम खर्च की तुलना में बहुत कम है।
चीन की भविष्य की योजनाएँ
चीन AI के विकास को लेकर बेहद गंभीर है और भविष्य के लिए बड़ी योजनाएँ बना रहा है। देश की बड़ी कंपनियाँ कंप्यूटिंग हब का एक नेटवर्क बनाने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। इसके अलावा, चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना (2026-2030) के दौरान इस क्षेत्र में बड़े पैमाने पर निवेश किए जाने की उम्मीद है। इसी के तहत चीन ने अगले पाँच वर्षों में आधुनिक डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए 295 अरब डॉलर के निवेश की योजना बनाई है। इससे पहले भी चीन कुंगफू करने वाले और सबसे तेज़ दौड़ने वाले रोबोट्स बनाकर अपनी तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन कर चुका है।
इनपुट: IANS



