पंजाब: पराली जलाने की 1000 से ज़्यादा घटनाएं, तरनतारन-अमृतसर-फिरोजपुर सबसे आगे
पंजाब में धान की कटाई के साथ ही पराली जलाने के मामले एक बार फिर तेज़ी से बढ़ रहे हैं। राज्य में 29 अक्टूबर तक पराली जलाने की कुल 1,007 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के…
पंजाब में धान की कटाई के साथ ही पराली जलाने के मामले एक बार फिर तेज़ी से बढ़ रहे हैं। राज्य में 29 अक्टूबर तक पराली जलाने की कुल 1,007 घटनाएं दर्ज की जा चुकी हैं। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज़्यादा प्रभावित जिलों में सीमावर्ती क्षेत्र तरनतारन, अमृतसर और फिरोजपुर शामिल हैं, जहाँ राज्य की दो-तिहाई से ज़्यादा घटनाएं सामने आई हैं।
पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PPCB) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, सिर्फ तरनतारन जिले में ही 397 मामले दर्ज हुए हैं, जो राज्य की कुल घटनाओं का लगभग 39 प्रतिशत है। इसके बाद अमृतसर में 171 और फिरोजपुर में 104 मामले सामने आए हैं। इन तीन जिलों को मिलाकर ही कुल 672 घटनाएं होती हैं, जो प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
किस जिले में कितने मामले?
आंकड़ों के अनुसार, राज्य के लगभग सभी जिलों में पराली जलाने की घटनाएं दर्ज की गई हैं। गुरदासपुर में 72, कपूरथला में 63, बठिंडा में 31, फाजिल्का में 28, जालंधर में 22 और फरीदकोट में 21 मामले सामने आए। वहीं, पटियाला और होशियारपुर में क्रमशः 16 और 12 घटनाएं दर्ज हुईं। संगरूर में भी 12 मामले सामने आए। मानसा एकमात्र ऐसा जिला रहा, जहाँ पराली जलाने की कोई घटना दर्ज नहीं की गई।
प्रशासनिक कार्रवाई और जुर्माना
रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य भर में दर्ज 1,007 घटनाओं में से अधिकारियों ने 778 जगहों का निरीक्षण किया, जिनमें से 379 मामलों में पराली जलाने की पुष्टि हुई। प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए 349 मामलों में कुल 17.50 लाख रुपये का पर्यावरण मुआवजा लगाया, जिसमें से 13.15 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है।
इसके अलावा, 246 मामलों में एफआईआर दर्ज की गई हैं और 297 खेतों के राजस्व रिकॉर्ड में 'रेड एंट्री' की गई है। अधिकारियों को लापरवाही के लिए 426 चेतावनियां और 'कारण बताओ नोटिस' भी जारी किए गए हैं। हालांकि, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) एक्ट के तहत किसी अधिकारी पर कानूनी कार्रवाई या निलंबन का कोई मामला सामने नहीं आया है।
इनपुट: IANS



