मकोका केस: AAP के पूर्व विधायक नरेश बालियान की जमानत अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व विधायक नरेश बालियान से जुड़े मकोका मामले में दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, यह नोटिस बालियान की उस जमानत याचिका पर…
सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (आप) के पूर्व विधायक नरेश बालियान से जुड़े मकोका मामले में दिल्ली सरकार को नोटिस जारी किया है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, यह नोटिस बालियान की उस जमानत याचिका पर जारी किया गया है, जिसे पहले दिल्ली हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया था। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने दिल्ली पुलिस को इस मामले में चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह मामला एक संगठित अपराध सिंडिकेट से जुड़ा है, जिसे कथित तौर पर फरार गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू चलाता है। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने नरेश बालियान को इसी सिलसिले में 4 दिसंबर, 2024 को गिरफ्तार किया था।
बालियान पर लगे आरोप
आरोपों के अनुसार, बालियान ने सांगवान के सिंडिकेट के लिए एक 'मददगार' (फैसिलिटेटर) के रूप में काम किया। उन पर जबरन वसूली के लिए लोगों की पहचान करने, फर्जी प्रॉपर्टी एग्रीमेंट तैयार करने और लोगों को कम कीमत पर संपत्ति बेचने के लिए मजबूर करने जैसे गंभीर आरोप हैं। इस मामले में कुछ ऑडियो क्लिप भी सामने आए थे, जिनमें कथित तौर पर बालियान को गैंगस्टर कपिल सांगवान से बातचीत करते हुए सुना जा सकता है। इन क्लिप्स से दिल्ली में बिल्डरों और अन्य लोगों से पैसे ऐंठने की योजना बनाने के संकेत मिले थे।
हाईकोर्ट ने खारिज की थी याचिका
इससे पहले, 3 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट ने बालियान को जमानत देने से इनकार कर दिया था। हाईकोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा था कि महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट (मकोका) जैसे विशेष कानूनों के तहत गंभीर अपराधों में केवल लंबे समय तक जेल में रहना जमानत का निर्णायक आधार नहीं हो सकता। हालांकि, नरेश बालियान ने लगातार अपने ऊपर लगे सभी आरोपों का खंडन किया है और मकोका के इस्तेमाल को कानून का दुरुपयोग व राजनीतिक प्रतिशोध की कार्रवाई बताया है।
इनपुट: IANS



